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Up: Foundation Stone Will Be Laid For Two Ayurveda Colleges And Ayush Hospital In Five Districts – यूपी : दो आयुर्वेद कॉलेज एवं पांच जिलों में आयुष अस्पताल का होगा शिलान्यास

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्‍तव
Updated Wed, 17 Nov 2021 12:48 PM IST

सार

एसीएस प्रशांत त्रिवेदी ने बताया कि अयोध्या के रुदौली तहसील और वाराणसी के पिंडरा तहसील में पांच -पांच एकड़ जमीन तलाश ली गई है। इस जमीन पर अधिग्रहण भी कर लिया गया है। इन दोनों जिलों में राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉॅलेज एवं चिकित्सालय बनाया जाएगा।

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प्रदेश के पांच जिलों में जल्द ही 50 बेड के आयुष चिकित्सालय बनेंगे। इसी तरह अयोध्या एवं वाराणसी में आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज खुलेगा। इसके लिए जमीन तलाश ली गई है। जल्द ही इनका शिलान्यास होगा। यह जानकारी आयुष विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रशांत त्रिवेदी ने दी। वह मंगलवार को आयुष मंत्रालय के सचिव पद्मश्री वैद्य राजेश कोटवा की अध्यक्षता में आयुष मिशन के विभिन्न कार्यक्रमों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।

एसीएस प्रशांत त्रिवेदी ने बताया कि अयोध्या के रुदौली तहसील और वाराणसी के पिंडरा तहसील में पांच -पांच एकड़ जमीन तलाश ली गई है। इस जमीन पर अधिग्रहण भी कर लिया गया है। इन दोनों जिलों में राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉॅलेज एवं चिकित्सालय बनाया जाएगा। इसी तरह गोरखपुर, हरदोई, संभल, उन्नाव, श्रावस्ती में 50 बेड के एकीकृत आयुष चिकित्सालय के लिए भी जीन मिल गई है। इसका शिलान्यास कराने की तैयारी है। 

प्रदेश में 2015- 16 से 2021-22 तक 24 एकीकृत आयुष चिकित्सालय स्वीकृत किए गए हैं, जिसमें 11 का निर्माण हो चुका है। आयुष विभाग के विशेष सचिव सुखलाल भारती ने बताया कि  871 हेल्थ वेलनेस सेंटर में 500 तैयार हो गए हैं। अन्य पर कार्य चल रहा है। आयुर्वेद निदेशक प्रो एसएन सिंह ने बताया कि 50 बेड के अस्पतालों में आयुर्वेदिक, यूनानी एवं होम्योपैथिक विधा की सुविधा मिलेगी। यहां पंचकर्म, क्षारसूत्र, रक्तमोक्षण, अग्निकर्म, इलाज बिद तदबीर आदि सुविधा देगी। यह रेफरल चिकित्साल होंगे। समीक्षा बैठक में संयुक्त सचिव डी सेंथिल पंडियन, आयुष मंत्रालय के उप सलाहकार डा. सुरेश कुमार, निदेशक यूनानी डा. मोहम्मद सिकंदर हयात, निदेशक होम्योपैथिक डा. मनोज यादव आदि मौजूद रहे।

छह गुना बढ़ा आयुष औषधियों का कारोबार : कोटेजा
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेजा ने कहा कि आयुष पद्धति के प्रति कोरोना काल में लोगों की रूचि बढ़ी है। एक सर्वे के मुताबिक कोविड काल में 89 फीसदी लोगों ने आयुष चिकित्सा का उपयोग किया, जिसमें 86 फीसदी लाभांवित हुए। फोरम ऑन इंडिया ट्रेडिशन मेडिसिन (एफआईटीएम) के मुताबिक पांच साल में आयुष औषधियों का कारोबार दो बिलियन डॉलर से बढ़कर 18.5 बिलियन डॉलर हो चुका है। इससे आयुष के प्रति लोगों के विश्वास का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे में आयुष विधा से जुड़े चिकित्सकों एवं अन्य अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ गई है।

आयुष चिकित्सालय का किया निरीक्षण
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेजा ने पूरी टीम के साथ लखनऊ के कल्ली पश्चिम स्थित नवनिर्मित 50 बेड के आयुष चिकित्सालय का निरीक्षण किया। इसके बाद वह राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय चंद्रावल के हेल्थ वेलनेस सेंटर का भी निरीक्षण किया। दोनों जगह की व्यवस्था पर संतोष जताया। निर्देश दिया कि अन्य सेंटरों पर भी इसी तरह की व्यवस्था की जाए।

विस्तार

प्रदेश के पांच जिलों में जल्द ही 50 बेड के आयुष चिकित्सालय बनेंगे। इसी तरह अयोध्या एवं वाराणसी में आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज खुलेगा। इसके लिए जमीन तलाश ली गई है। जल्द ही इनका शिलान्यास होगा। यह जानकारी आयुष विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रशांत त्रिवेदी ने दी। वह मंगलवार को आयुष मंत्रालय के सचिव पद्मश्री वैद्य राजेश कोटवा की अध्यक्षता में आयुष मिशन के विभिन्न कार्यक्रमों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।

एसीएस प्रशांत त्रिवेदी ने बताया कि अयोध्या के रुदौली तहसील और वाराणसी के पिंडरा तहसील में पांच -पांच एकड़ जमीन तलाश ली गई है। इस जमीन पर अधिग्रहण भी कर लिया गया है। इन दोनों जिलों में राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉॅलेज एवं चिकित्सालय बनाया जाएगा। इसी तरह गोरखपुर, हरदोई, संभल, उन्नाव, श्रावस्ती में 50 बेड के एकीकृत आयुष चिकित्सालय के लिए भी जीन मिल गई है। इसका शिलान्यास कराने की तैयारी है। 

प्रदेश में 2015- 16 से 2021-22 तक 24 एकीकृत आयुष चिकित्सालय स्वीकृत किए गए हैं, जिसमें 11 का निर्माण हो चुका है। आयुष विभाग के विशेष सचिव सुखलाल भारती ने बताया कि  871 हेल्थ वेलनेस सेंटर में 500 तैयार हो गए हैं। अन्य पर कार्य चल रहा है। आयुर्वेद निदेशक प्रो एसएन सिंह ने बताया कि 50 बेड के अस्पतालों में आयुर्वेदिक, यूनानी एवं होम्योपैथिक विधा की सुविधा मिलेगी। यहां पंचकर्म, क्षारसूत्र, रक्तमोक्षण, अग्निकर्म, इलाज बिद तदबीर आदि सुविधा देगी। यह रेफरल चिकित्साल होंगे। समीक्षा बैठक में संयुक्त सचिव डी सेंथिल पंडियन, आयुष मंत्रालय के उप सलाहकार डा. सुरेश कुमार, निदेशक यूनानी डा. मोहम्मद सिकंदर हयात, निदेशक होम्योपैथिक डा. मनोज यादव आदि मौजूद रहे।

छह गुना बढ़ा आयुष औषधियों का कारोबार : कोटेजा

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेजा ने कहा कि आयुष पद्धति के प्रति कोरोना काल में लोगों की रूचि बढ़ी है। एक सर्वे के मुताबिक कोविड काल में 89 फीसदी लोगों ने आयुष चिकित्सा का उपयोग किया, जिसमें 86 फीसदी लाभांवित हुए। फोरम ऑन इंडिया ट्रेडिशन मेडिसिन (एफआईटीएम) के मुताबिक पांच साल में आयुष औषधियों का कारोबार दो बिलियन डॉलर से बढ़कर 18.5 बिलियन डॉलर हो चुका है। इससे आयुष के प्रति लोगों के विश्वास का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे में आयुष विधा से जुड़े चिकित्सकों एवं अन्य अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ गई है।

आयुष चिकित्सालय का किया निरीक्षण

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेजा ने पूरी टीम के साथ लखनऊ के कल्ली पश्चिम स्थित नवनिर्मित 50 बेड के आयुष चिकित्सालय का निरीक्षण किया। इसके बाद वह राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय चंद्रावल के हेल्थ वेलनेस सेंटर का भी निरीक्षण किया। दोनों जगह की व्यवस्था पर संतोष जताया। निर्देश दिया कि अन्य सेंटरों पर भी इसी तरह की व्यवस्था की जाए।



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Tet Paper Leak Case: Stf Disclosed Gang Members Given Typing Work Of Paper To School College Students – टीईटी पेपर लीक प्रकरण : एसटीएफ का खुलासा, स्कूल-कॉलेज के छात्रों से टाइप कराया पेपर, उन्हें ही बनाया प्रूफ रीडर

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अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 03 Dec 2021 12:43 AM IST

सार

पेपर लीक मामले की जांच कर रही यूपी एसटीएफ को पड़ताल के दौरान कई ऐसे सुराग मिले हैं जिससे साबित होता है कि इस पूरी प्रक्रिया को एजेंसी ने बिल्कुल भी गंभीरता से नहीं लिया और गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाया।

ख़बर सुनें

टीईटी पेपर लीक मामले में एसटीएफ ने बड़ा खुलासा किया है। एसटीएफ ने दावा किया है कि प्रश्नपत्र छापने वाली एजेंसी ने काम मिलने के बाद टाइपिंग का काम स्कूली छात्रों को दे दिया। प्रश्नपत्रों की प्रिंटिंग के बाद प्रूफ रीडिंग, डिजाइनिंग, पैकिंग की जिम्मेदारी भी इन्हीं स्कूलों छात्रों को दे दी। परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने हस्त लिखित प्रश्नों की सूची एजेंसी को उपलब्ध कराई थी।
    
पेपर लीक मामले की जांच कर रही यूपी एसटीएफ को पड़ताल के दौरान कई ऐसे सुराग मिले हैं जिससे साबित होता है कि इस पूरी प्रक्रिया को एजेंसी ने बिल्कुल भी गंभीरता से नहीं लिया और गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाया। इस पेपर की संवेदनशीलता का भी अंदाजा एजेंसी को नहीं था। एजेंसी के पास मैनपावर भी नहीं थे। मैनपावर की भर्ती प्रश्नपत्र छापने का आदेश मिलने के बाद शुरू की गई। आनन फानन में आरएसएम फिनसर्व ने प्राइवेट कर्मचारियों की असुरक्षित तरीके से नियुक्ति की। 

प्रश्नपत्र की अलग अलग भाषाओं हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू व संस्कृत में टाइपिंग के लिए स्कूल और कालेज के छात्र-छात्राओं को अनियमित तरीके से बुलाया गया। इन कामों को सीसीटीवी सर्विलांस के अंडर में होना था, लेकिन एजेंसी के पास ऐसा कोई रिकार्ड नहीं मिला। सूत्रों का कहना है कि जिन प्रिंटिंग प्रेस को काम सौंपा गया वहां भी बिना अनुबंध के काम दे दिया गया। यहां तक की गोपनीयता बनाए रखने के लिए कोई भी नन डिस्क्लोजर एग्रीमेंट नहीं किया गया। एसटीएफ इस पूरे मामले की परत दर परत पलट रही है। इस मामले में एजेंसी के निदेशक राय अनूप प्रसाद और परीक्षा नियामक प्राधिकारी के सचिव संजय उपाध्याय पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

सॉल्वर गिरोह के सरगना की तलाश के लिए पूर्वांचल में एसटीएफ हुई सक्रिय
उधर, टीईटी परीक्षा में बड़ी संख्या में साल्वर यूपी आए थे। इसमें अधिकतर बिहार से आए थे। एसटीएफ ने इस मामले में अब तक 35 लोगों को गिरफ्तार किया है। इसमें लगभग आधे साल्वर हैं। और इतने ही साल्वर की तलाश एसटीएफ को है। एसटीएफ के एक सूत्र ने बताया कि पूर्वांचल में ही इस गिरोह के लोगों ने ठिकाना बनाया था और जहां मामला सेट हो जाता वहां चार से छह घंटे में साल्वर भेज दिए जा रहे थे। एसटीएफ इस मामले में प्रकाश में आए राजन नाम के सरगना की तलाश कर रही है।

विस्तार

टीईटी पेपर लीक मामले में एसटीएफ ने बड़ा खुलासा किया है। एसटीएफ ने दावा किया है कि प्रश्नपत्र छापने वाली एजेंसी ने काम मिलने के बाद टाइपिंग का काम स्कूली छात्रों को दे दिया। प्रश्नपत्रों की प्रिंटिंग के बाद प्रूफ रीडिंग, डिजाइनिंग, पैकिंग की जिम्मेदारी भी इन्हीं स्कूलों छात्रों को दे दी। परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने हस्त लिखित प्रश्नों की सूची एजेंसी को उपलब्ध कराई थी।

    

पेपर लीक मामले की जांच कर रही यूपी एसटीएफ को पड़ताल के दौरान कई ऐसे सुराग मिले हैं जिससे साबित होता है कि इस पूरी प्रक्रिया को एजेंसी ने बिल्कुल भी गंभीरता से नहीं लिया और गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाया। इस पेपर की संवेदनशीलता का भी अंदाजा एजेंसी को नहीं था। एजेंसी के पास मैनपावर भी नहीं थे। मैनपावर की भर्ती प्रश्नपत्र छापने का आदेश मिलने के बाद शुरू की गई। आनन फानन में आरएसएम फिनसर्व ने प्राइवेट कर्मचारियों की असुरक्षित तरीके से नियुक्ति की। 

प्रश्नपत्र की अलग अलग भाषाओं हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू व संस्कृत में टाइपिंग के लिए स्कूल और कालेज के छात्र-छात्राओं को अनियमित तरीके से बुलाया गया। इन कामों को सीसीटीवी सर्विलांस के अंडर में होना था, लेकिन एजेंसी के पास ऐसा कोई रिकार्ड नहीं मिला। सूत्रों का कहना है कि जिन प्रिंटिंग प्रेस को काम सौंपा गया वहां भी बिना अनुबंध के काम दे दिया गया। यहां तक की गोपनीयता बनाए रखने के लिए कोई भी नन डिस्क्लोजर एग्रीमेंट नहीं किया गया। एसटीएफ इस पूरे मामले की परत दर परत पलट रही है। इस मामले में एजेंसी के निदेशक राय अनूप प्रसाद और परीक्षा नियामक प्राधिकारी के सचिव संजय उपाध्याय पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

सॉल्वर गिरोह के सरगना की तलाश के लिए पूर्वांचल में एसटीएफ हुई सक्रिय

उधर, टीईटी परीक्षा में बड़ी संख्या में साल्वर यूपी आए थे। इसमें अधिकतर बिहार से आए थे। एसटीएफ ने इस मामले में अब तक 35 लोगों को गिरफ्तार किया है। इसमें लगभग आधे साल्वर हैं। और इतने ही साल्वर की तलाश एसटीएफ को है। एसटीएफ के एक सूत्र ने बताया कि पूर्वांचल में ही इस गिरोह के लोगों ने ठिकाना बनाया था और जहां मामला सेट हो जाता वहां चार से छह घंटे में साल्वर भेज दिए जा रहे थे। एसटीएफ इस मामले में प्रकाश में आए राजन नाम के सरगना की तलाश कर रही है।



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Employees And Teacher Leaders Attacked On State Government – पुरानी पेंशन बहाल नहीं हुई तो चुनाव में सिखाएंगे सबक: शिक्षकों, कर्मचारियों, अधिकारियों व पेंशनर्स ने भरी हुंकार

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सार

उत्तर प्रदेश शिक्षक, कर्मचारी, अधिकारी और पेंशनर्स अधिकार मंच के बैनर तले आयोजित महारैली में मंच के अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाल नहीं हुई तो विधानसभा चुनाव में प्रदेश सरकार को सबक सिखाएंगे। 
 

शिक्षकों, कर्मचारियों का प्रदर्शन
– फोटो : अमर उजाला

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पुरानी पेंशन बहाली, शिक्षकों की लंबित पदोन्नति जल्द करने, शिक्षकों और कर्मचारियों की वेतन विसंगति दूर करने सहित अन्य मांगों को लेकर प्रदेश के शिक्षकों, कर्मचारियों, अधिकारियों और पेंशनर्स ने मंगलवार को राजधानी के ईको गार्डन में हुंकार भरी। 

उत्तर प्रदेश शिक्षक, कर्मचारी, अधिकारी और पेंशनर्स अधिकार मंच के बैनर तले आयोजित महारैली में मंच के अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाल नहीं हुई तो विधानसभा चुनाव में प्रदेश सरकार को सबक सिखाएंगे। 

सिर पर सफेद टोपी लगाए शिक्षक व कर्मचारियों से खचाखच भरे ईको गार्डन में ‘चाहे जो मजबूरी हो, हमारी मांगे पूरी हो’, ‘जाति धर्म का भेद मिटाओ, पुरानी पेंशन बहाल कराओ’, ‘पुरानी पेंशन अधिकार है, बुढ़ापे का आधार है’ जैसे नारे गूंज रहे थे। डॉ. शर्मा ने कहा कि पहले सरकारें कर्मचारियों व शिक्षकों की समस्याओं को सुनकर उनके निराकरण का प्रयास करती थी, लेकिन यह पहली सरकार है, जो कर्मचारियों के लंबे संघर्ष से हासिल उपलब्धियों व अधिकारों को छीन रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते का 10 हजार करोड़ का भुगतान रोका हुआ है। एक दर्जन से अधिक भत्ते खत्म कर दिए है। बेसिक शिक्षा में प्रधानाध्यापकों के हजारों पद समाप्त कर दिए हैं। पिछले पांच वर्ष के कार्यकाल में एक भी शिक्षक को पदोन्नति नहीं दी गई है। शिक्षामित्र व अनुदेशकों को भुखमरी की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया गया है। आंगनबाड़ियों व रसोइया भी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।
वहीं, मंच के प्रधान महासचिव सुशील त्रिपाठी ने कहा कि सरकार कर्मचारियों के साथ सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है। इस महारैली ने यह साबित कर दिया कि शिक्षकों व कर्मचारियों में सरकार के प्रति बहुत आक्रोश है। 

इसके खामियाजा सरकार को आने वाले विधानसभा चुनाव में चुकाना पड़ सकता है। विधान परिषद सदस्य ध्रुव कुमार त्रिपाठी, सुरेश त्रिपाठी और डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के महासचिव जीएन सिंह सहित अन्य कर्मचारी, शिक्षक और अधिकारी संगठनों के पदाधिकारियों ने भी महारैली को संबोधित किया।

सत्ता पलटने में भी सक्षम है मंच
उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष इंजीनियर हरिकिशोर तिवारी ने कहा कि संविदा कर्मियों को नियमित नहीं किया जा रहा है। वहीं, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष हेम सिंह पुंडीर ने कहा कि पुरानी पेंशन कर्मचारियों और शिक्षकों का अधिकार है। 

सरकार लगातार कर्मचारियों और शिक्षकों के खिलाफ निर्णय ले रही है। तो उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री संजय सिंह ने सवाल उठाया कि जब विधायक और सांसद को पांच साल के कार्यकाल पर पेंशन मिलती है। तब कर्मचारियों, अधिकारियों और शिक्षकों को 30-35 सालों की सेवा के बाद भी पेंशन क्यों नहीं दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो मंच सत्ता पलटने में भी सक्षम है।
 

विस्तार

पुरानी पेंशन बहाली, शिक्षकों की लंबित पदोन्नति जल्द करने, शिक्षकों और कर्मचारियों की वेतन विसंगति दूर करने सहित अन्य मांगों को लेकर प्रदेश के शिक्षकों, कर्मचारियों, अधिकारियों और पेंशनर्स ने मंगलवार को राजधानी के ईको गार्डन में हुंकार भरी। 

उत्तर प्रदेश शिक्षक, कर्मचारी, अधिकारी और पेंशनर्स अधिकार मंच के बैनर तले आयोजित महारैली में मंच के अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाल नहीं हुई तो विधानसभा चुनाव में प्रदेश सरकार को सबक सिखाएंगे। 

सिर पर सफेद टोपी लगाए शिक्षक व कर्मचारियों से खचाखच भरे ईको गार्डन में ‘चाहे जो मजबूरी हो, हमारी मांगे पूरी हो’, ‘जाति धर्म का भेद मिटाओ, पुरानी पेंशन बहाल कराओ’, ‘पुरानी पेंशन अधिकार है, बुढ़ापे का आधार है’ जैसे नारे गूंज रहे थे। डॉ. शर्मा ने कहा कि पहले सरकारें कर्मचारियों व शिक्षकों की समस्याओं को सुनकर उनके निराकरण का प्रयास करती थी, लेकिन यह पहली सरकार है, जो कर्मचारियों के लंबे संघर्ष से हासिल उपलब्धियों व अधिकारों को छीन रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते का 10 हजार करोड़ का भुगतान रोका हुआ है। एक दर्जन से अधिक भत्ते खत्म कर दिए है। बेसिक शिक्षा में प्रधानाध्यापकों के हजारों पद समाप्त कर दिए हैं। पिछले पांच वर्ष के कार्यकाल में एक भी शिक्षक को पदोन्नति नहीं दी गई है। शिक्षामित्र व अनुदेशकों को भुखमरी की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया गया है। आंगनबाड़ियों व रसोइया भी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।



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Papers Of Six Examinations Leaked In Four Years: Examinations From Tet To Police Recruitment Included – चार साल में छह परीक्षाओं के पेपर हुए लीक : टीईटी से लेकर पुलिस भर्ती तक की परीक्षाएं शामिल

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्‍तव
Updated Mon, 29 Nov 2021 12:58 PM IST

सार

एसटीएफ परीक्षाओं में पेपर लीक करने वालों पर नजर रखती है। यही वजह है कि लगभग हर परीक्षा में सॉल्वर गैंग पकड़े जाते हैं।

यूपी टीईटी पेपर लीक
– फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

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प्रदेश में बीते चार साल में छह बार राज्य स्तरीय परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। इससे दोबारा परीक्षाएं करानी पड़ीं। इनमें पुलिस भर्ती से लेकर टीईटी तक की परीक्षाएं शामिल हैं।

जानकारी के अनुसार 25 जुलाई 2017 को प्रदेश में दरोगा भर्ती के लिए परीक्षा हुई थी। इस परीक्षा के प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से एक घंटा पहले ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद परीक्षा को निरस्त कर दिया गया था। इसी तरह मार्च 2018 में पावर कॉर्पोरेशन में जेई, एई की भर्ती परीक्षा में भी एसटीएफ ने गैंग पकड़ कर पेपर आउट होने का खुलासा किया था। इसके बाद यह परीक्षा रद्द कर दोबारा कराई गई थी। 2018 में ही 15 जुलाई को अवर अधीनस्थ सेवा के 641 पदों के लिए भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हुआ था। इसका खुलासा एसटीएफ ने तीन माह बाद किया था। 

जून 2018 में हुई सिपाही भर्ती परीक्षा का दूसरी पाली का प्रश्न पत्र पहली पाली में बंट जाने से परीक्षा निरस्त कर दी गई थी। 2 सितंबर 2018 को नलकूप ऑपरेटर की भर्ती परीक्षा का भी पेपर लीक हुआ था। इसमें यूपी एसटीएफ ने 11 लोगों को गिरफ्तार किया था। यह परीक्षा भी दोबारा हुई थी। इसी तरह रविवार को यूपी टीईटी का प्रश्नपत्र लीक होने से परीक्षा निरस्त की गई है। हालांकि एसटीएफ परीक्षाओं में पेपर लीक करने वालों पर नजर रखती है। यही वजह है कि लगभग हर परीक्षा में सॉल्वर गैंग पकड़े जाते हैं। चल रही दरोगा भर्ती परीक्षा में भी अब तक डेढ़ दर्जन सॉल्वर और नकल कराने वाले गिरोह को यूपी एसटीएफ ने दबोचा है।

विस्तार

प्रदेश में बीते चार साल में छह बार राज्य स्तरीय परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। इससे दोबारा परीक्षाएं करानी पड़ीं। इनमें पुलिस भर्ती से लेकर टीईटी तक की परीक्षाएं शामिल हैं।

जानकारी के अनुसार 25 जुलाई 2017 को प्रदेश में दरोगा भर्ती के लिए परीक्षा हुई थी। इस परीक्षा के प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से एक घंटा पहले ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद परीक्षा को निरस्त कर दिया गया था। इसी तरह मार्च 2018 में पावर कॉर्पोरेशन में जेई, एई की भर्ती परीक्षा में भी एसटीएफ ने गैंग पकड़ कर पेपर आउट होने का खुलासा किया था। इसके बाद यह परीक्षा रद्द कर दोबारा कराई गई थी। 2018 में ही 15 जुलाई को अवर अधीनस्थ सेवा के 641 पदों के लिए भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हुआ था। इसका खुलासा एसटीएफ ने तीन माह बाद किया था। 

जून 2018 में हुई सिपाही भर्ती परीक्षा का दूसरी पाली का प्रश्न पत्र पहली पाली में बंट जाने से परीक्षा निरस्त कर दी गई थी। 2 सितंबर 2018 को नलकूप ऑपरेटर की भर्ती परीक्षा का भी पेपर लीक हुआ था। इसमें यूपी एसटीएफ ने 11 लोगों को गिरफ्तार किया था। यह परीक्षा भी दोबारा हुई थी। इसी तरह रविवार को यूपी टीईटी का प्रश्नपत्र लीक होने से परीक्षा निरस्त की गई है। हालांकि एसटीएफ परीक्षाओं में पेपर लीक करने वालों पर नजर रखती है। यही वजह है कि लगभग हर परीक्षा में सॉल्वर गैंग पकड़े जाते हैं। चल रही दरोगा भर्ती परीक्षा में भी अब तक डेढ़ दर्जन सॉल्वर और नकल कराने वाले गिरोह को यूपी एसटीएफ ने दबोचा है।



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