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Noida’s Ranking Improved By Door-to-door Garbage Collection – घर-घर कूड़ा उठाने से सुधरी नोएडा की रैंकिंग

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नोएडा (संजय शिशौदिया)। स्वच्छ सर्वेक्षण में घर-घर से कूड़ा उठाने व निस्तारण ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्राधिकरण की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) रितु माहेश्वरी ने कहा कि घर-घर से कूड़ा उठाना बड़ी चुनौती थी। हमने इसे स्वीकार किया। आज नोएडा के प्रत्येक सेक्टर व गांव के घरों से कूड़ा उठाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि डोर-टू-डोर कूडा कलेक्शन व्यवस्था को हमने इसी साल से और अधिक प्रभावी बनाते हुए हाउस होल्ड मैपिंग कराई। बीते साल सूखा, गीला, इलेक्ट्रॉनिक, मेडिकल वेस्ट आदि करीब चार लाख टन कूडे़ का निस्तारण वैज्ञानिक तरीके से किया गया। कूडे़ की तीन में से दो साइट को खाली कर दिया गया है। यहां अब वेटलैंड विकसित किए जा रहे हैं, जबकि तीसरी साइट पर काम चल रहा है। कंस्ट्रक्शन वेस्ट के लिए सेक्टर-18 में सीएमडी प्लांट स्थापित किया गया है। कूड़ा मुक्त शहर का सर्वेक्षण चार श्रेणियों वन स्टार, थ्री स्टार, फाइव स्टार और सेवन स्टार में होता है। सेवन स्टार की श्रेणी में कोई शहर नहीं आया। देशभर में कूड़ा मुक्त शहर श्रेणी में नोएडा समेत कुल 9 शहरों को ही फाइव स्टार रैंक मिली है।
स्वच्छ सर्वेक्षण में शामिल हुए 4320 शहर
इस बार के स्वच्छ सर्वेक्षण में 4320 शहरों-नगरों को शामिल किया गया है, जो दुनिया का सबसे बड़ा स्वच्छता सर्वेक्षण है। साल 2016 में इस कदम की शुरुआत पर सिर्फ 73 प्रमुख शहरों को सर्वेक्षण में शामिल किया गया था।
शहर के 5.30 लाख लोगों ने दिया फीडबैक
जन सहभागिता से पुरस्कार मिलना आसान हुआ है। सीईओ ने कहा कि नोएडा को उच्च रैंकिंग प्राप्त करने में सहयोग करते हुए शहर के लोगों की ओर से 5.30 लाख फीडबैक दिए गए। प्राधिकरण अपने इन नागरिकों का दिल से शुक्रिया अदा करता है। साथ ही, उनसे अपील की जाती है कि 2022 में नोएडा को नंबर वन बनवाने में प्राधिकरण का सहयोग करें।
आसान नहीं नंबर-1 बनना पर हौसला बुलंद है
सीईओ ने कहा कि नंबर वन बनना आसान बात नहीं है, लेकिन अब इतना कठिन भी नहीं लगता। हमने 324वें से मात्र चार साल में ही चौथा स्थान हासिल किया है। अब हमारे हौसले बुलंद हैं। 2022 में नंबर एक बनने के लिए अब हम और अधिक ठोस कदम उठाएंगे। हालांकि, मौजूदा स्थिति को कायम रखना और आगे बढ़ना एक चुनौती है। जल की दिशा में इस बार हम कामयाब नहीं हो पाए, लेकिन हार नहीं मानी है। इसके लिए और बेहतर उपाय किए जाएंगे।
सफाई कर्मियों को शहर सेवक के नाम से किया संबोधित
सीईओ ने इस उपलब्धि के लिए उद्यान विभाग, सिविल विभाग विभाग की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने सफाई कर्मचारियों को शहर सेवक नाम से संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने इस शहर को स्वच्छता रैंकिंग में लाने के लिए कड़ी मेहनत की है। नाले साफ करने की चुनौती आज भी है। शहर सेवकों के लिए बेहतर उपकरणों की व्यवस्था की जाएगी।

नोएडा (संजय शिशौदिया)। स्वच्छ सर्वेक्षण में घर-घर से कूड़ा उठाने व निस्तारण ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्राधिकरण की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) रितु माहेश्वरी ने कहा कि घर-घर से कूड़ा उठाना बड़ी चुनौती थी। हमने इसे स्वीकार किया। आज नोएडा के प्रत्येक सेक्टर व गांव के घरों से कूड़ा उठाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि डोर-टू-डोर कूडा कलेक्शन व्यवस्था को हमने इसी साल से और अधिक प्रभावी बनाते हुए हाउस होल्ड मैपिंग कराई। बीते साल सूखा, गीला, इलेक्ट्रॉनिक, मेडिकल वेस्ट आदि करीब चार लाख टन कूडे़ का निस्तारण वैज्ञानिक तरीके से किया गया। कूडे़ की तीन में से दो साइट को खाली कर दिया गया है। यहां अब वेटलैंड विकसित किए जा रहे हैं, जबकि तीसरी साइट पर काम चल रहा है। कंस्ट्रक्शन वेस्ट के लिए सेक्टर-18 में सीएमडी प्लांट स्थापित किया गया है। कूड़ा मुक्त शहर का सर्वेक्षण चार श्रेणियों वन स्टार, थ्री स्टार, फाइव स्टार और सेवन स्टार में होता है। सेवन स्टार की श्रेणी में कोई शहर नहीं आया। देशभर में कूड़ा मुक्त शहर श्रेणी में नोएडा समेत कुल 9 शहरों को ही फाइव स्टार रैंक मिली है।

स्वच्छ सर्वेक्षण में शामिल हुए 4320 शहर

इस बार के स्वच्छ सर्वेक्षण में 4320 शहरों-नगरों को शामिल किया गया है, जो दुनिया का सबसे बड़ा स्वच्छता सर्वेक्षण है। साल 2016 में इस कदम की शुरुआत पर सिर्फ 73 प्रमुख शहरों को सर्वेक्षण में शामिल किया गया था।

शहर के 5.30 लाख लोगों ने दिया फीडबैक

जन सहभागिता से पुरस्कार मिलना आसान हुआ है। सीईओ ने कहा कि नोएडा को उच्च रैंकिंग प्राप्त करने में सहयोग करते हुए शहर के लोगों की ओर से 5.30 लाख फीडबैक दिए गए। प्राधिकरण अपने इन नागरिकों का दिल से शुक्रिया अदा करता है। साथ ही, उनसे अपील की जाती है कि 2022 में नोएडा को नंबर वन बनवाने में प्राधिकरण का सहयोग करें।

आसान नहीं नंबर-1 बनना पर हौसला बुलंद है

सीईओ ने कहा कि नंबर वन बनना आसान बात नहीं है, लेकिन अब इतना कठिन भी नहीं लगता। हमने 324वें से मात्र चार साल में ही चौथा स्थान हासिल किया है। अब हमारे हौसले बुलंद हैं। 2022 में नंबर एक बनने के लिए अब हम और अधिक ठोस कदम उठाएंगे। हालांकि, मौजूदा स्थिति को कायम रखना और आगे बढ़ना एक चुनौती है। जल की दिशा में इस बार हम कामयाब नहीं हो पाए, लेकिन हार नहीं मानी है। इसके लिए और बेहतर उपाय किए जाएंगे।

सफाई कर्मियों को शहर सेवक के नाम से किया संबोधित

सीईओ ने इस उपलब्धि के लिए उद्यान विभाग, सिविल विभाग विभाग की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने सफाई कर्मचारियों को शहर सेवक नाम से संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने इस शहर को स्वच्छता रैंकिंग में लाने के लिए कड़ी मेहनत की है। नाले साफ करने की चुनौती आज भी है। शहर सेवकों के लिए बेहतर उपकरणों की व्यवस्था की जाएगी।



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Metro Travel Dream, Deprived Of Other Facilities Too – मेट्रो का सफर सपना, अन्य सुविधाओं से भी वंचित

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ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित इकलौता पार्क।
– फोटो : Grnoida

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ग्रेटर नोएडा। ग्रेनो वेस्ट की जनसंख्या आठ साल में तीन लाख तक पहुंच चुकी है, लेकिन निवासियों को शून्य सुविधाओं में जीवनयापन करना पड़ रहा है। लोगों को मेट्रो से सफर का सपना दिखाया गया था, जो आज भी सपना ही है। यहां यातायात के नाम पर व्यवस्था शून्य है। वहीं, सरकारी इलाज के नाम पर कोई बेहतर व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा सेंट्रल पार्क, आधार सेंटर, हरियाली और स्टेडियम समेत अन्य जरूरी सुविधाओं से भी महरूम हैं। ग्रेनो वेस्ट में करीब 150 ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट हैं। वर्ष 2012-13 से प्रोजेक्टों में खरीदारों को कब्जा मिलना शुरू हो गया था। बीते कुछ साल में ग्रेनो वेस्ट की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। इस समय 70 से अधिक सोसाइटियों में करीब तीन लाख लोग रह रहे हैं। भविष्य में जनसंख्या दस लाख से अधिक होगी, लेकिन इसके हिसाब से वहां पर सुविधाओं को विकसित नहीं किया जा रहा है। आठ साल से ग्रेनो वेस्ट के निवासी जरूरी सुविधाएं मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
बस चली और न मेट्रो दौड़ी
ग्रेनो वेस्ट में फ्लैटों की बिक्री मेट्रो का सपना दिखाकर की गई थी। तब कहा गया था कि नोएडा से मेट्रो ग्रेनो वेस्ट आएगी और फिर सूरजपुर होकर ग्रेटर नोएडा जाएगी। बाद में इसका रूट बदल दिया गया। ग्रेनो वेस्ट को मेट्रो से नहीं जोड़ा गया। अब नोएडा मेट्रो का ग्रेनो वेस्ट तक विस्तार करने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन दो साल से टेंडर की प्रक्रिया को पूरा नहीं किया जा सका। वहीं, दो साल पहले नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (एनएमआरसी) ने बस सेवा शुरू की थी, वो भी बंद हो चुकी है। स्थानीय निवासी पूरी तरह से ऑटो व निजी वाहनों पर निर्भर हैं।
इतनी बड़ी आबादी और केवल एक पार्क
ग्रेनो वेस्ट ग्रेटर नोएडा का हिस्सा है, लेकिन दोनों जगह की हरियाली में अंतर है। ग्रेनो वेस्ट में हरियाली नाममात्र की है। हर समय धूल उड़ती रहती है। पार्क भी केवल एक है। कुछ जगह पार्क की जमीन आरक्षित है, लेकिन विकसित नहीं किया जा सका है। स्थानीय निवासी सेंट्रल पार्क समेत हर सेक्टर में पार्क बनाने की मांग कर रहे हैं।
सुविधाएं विकसित करने पर नहीं ध्यान
ग्रेनो वेस्ट के निवासियों को रामलीला मैदान चाहिए। आधार कार्ड सेंटर की जरूरत है। पोस्ट ऑफिस है, लेकिन वह ठीक से काम नहीं कर रहा है। सरकारी अस्पताल नहीं है। इलाज कराने के लिए निजी अस्पतालों पर निर्भर हैं। जहां इलाज काफी महंगा है। ग्रेनो वेस्ट में एक अच्छे व बड़े सरकारी अस्पताल की दरकार है। खेल सुविधा भी शून्य है। कोई सरकारी स्टेडियम नहीं है।
ग्रेनो वेस्ट में यातायात की कोई व्यवस्था नहीं है। जनसंख्या बढ़ती जा रही है। अगर अभी यातायात व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया तो फिर निवासियों को मुश्किल होगी। मेट्रो आने का इंतजार हो रहा है।
– चंदन चौधरी, पैरामाउंट इमोशन
हर कोई निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च नहीं उठा सकता। सरकारी इलाज के लिए नोएडा जाना होता है। यहां भी सरकारी अस्पताल बनाने के साथ अन्य सुविधा विकसित करने पर भी प्राधिकरण को ध्यान देना चाहिए।
– राजकुमार, इको विलेज दो

ग्रेटर नोएडा। ग्रेनो वेस्ट की जनसंख्या आठ साल में तीन लाख तक पहुंच चुकी है, लेकिन निवासियों को शून्य सुविधाओं में जीवनयापन करना पड़ रहा है। लोगों को मेट्रो से सफर का सपना दिखाया गया था, जो आज भी सपना ही है। यहां यातायात के नाम पर व्यवस्था शून्य है। वहीं, सरकारी इलाज के नाम पर कोई बेहतर व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा सेंट्रल पार्क, आधार सेंटर, हरियाली और स्टेडियम समेत अन्य जरूरी सुविधाओं से भी महरूम हैं। ग्रेनो वेस्ट में करीब 150 ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट हैं। वर्ष 2012-13 से प्रोजेक्टों में खरीदारों को कब्जा मिलना शुरू हो गया था। बीते कुछ साल में ग्रेनो वेस्ट की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। इस समय 70 से अधिक सोसाइटियों में करीब तीन लाख लोग रह रहे हैं। भविष्य में जनसंख्या दस लाख से अधिक होगी, लेकिन इसके हिसाब से वहां पर सुविधाओं को विकसित नहीं किया जा रहा है। आठ साल से ग्रेनो वेस्ट के निवासी जरूरी सुविधाएं मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

बस चली और न मेट्रो दौड़ी

ग्रेनो वेस्ट में फ्लैटों की बिक्री मेट्रो का सपना दिखाकर की गई थी। तब कहा गया था कि नोएडा से मेट्रो ग्रेनो वेस्ट आएगी और फिर सूरजपुर होकर ग्रेटर नोएडा जाएगी। बाद में इसका रूट बदल दिया गया। ग्रेनो वेस्ट को मेट्रो से नहीं जोड़ा गया। अब नोएडा मेट्रो का ग्रेनो वेस्ट तक विस्तार करने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन दो साल से टेंडर की प्रक्रिया को पूरा नहीं किया जा सका। वहीं, दो साल पहले नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (एनएमआरसी) ने बस सेवा शुरू की थी, वो भी बंद हो चुकी है। स्थानीय निवासी पूरी तरह से ऑटो व निजी वाहनों पर निर्भर हैं।

इतनी बड़ी आबादी और केवल एक पार्क

ग्रेनो वेस्ट ग्रेटर नोएडा का हिस्सा है, लेकिन दोनों जगह की हरियाली में अंतर है। ग्रेनो वेस्ट में हरियाली नाममात्र की है। हर समय धूल उड़ती रहती है। पार्क भी केवल एक है। कुछ जगह पार्क की जमीन आरक्षित है, लेकिन विकसित नहीं किया जा सका है। स्थानीय निवासी सेंट्रल पार्क समेत हर सेक्टर में पार्क बनाने की मांग कर रहे हैं।

सुविधाएं विकसित करने पर नहीं ध्यान

ग्रेनो वेस्ट के निवासियों को रामलीला मैदान चाहिए। आधार कार्ड सेंटर की जरूरत है। पोस्ट ऑफिस है, लेकिन वह ठीक से काम नहीं कर रहा है। सरकारी अस्पताल नहीं है। इलाज कराने के लिए निजी अस्पतालों पर निर्भर हैं। जहां इलाज काफी महंगा है। ग्रेनो वेस्ट में एक अच्छे व बड़े सरकारी अस्पताल की दरकार है। खेल सुविधा भी शून्य है। कोई सरकारी स्टेडियम नहीं है।

ग्रेनो वेस्ट में यातायात की कोई व्यवस्था नहीं है। जनसंख्या बढ़ती जा रही है। अगर अभी यातायात व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया तो फिर निवासियों को मुश्किल होगी। मेट्रो आने का इंतजार हो रहा है।

– चंदन चौधरी, पैरामाउंट इमोशन

हर कोई निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च नहीं उठा सकता। सरकारी इलाज के लिए नोएडा जाना होता है। यहां भी सरकारी अस्पताल बनाने के साथ अन्य सुविधा विकसित करने पर भी प्राधिकरण को ध्यान देना चाहिए।

– राजकुमार, इको विलेज दो



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Logistics Cost Will Come Down From Airport, Time Will Be Saved – एयरपोर्ट से लॉजिस्टिक लागत में आएगी कमी, समय की होगी बचत

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लखनऊ/ग्रेटर नोएडा। नोएडा एयरपोर्ट के निर्माण से लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी। साथ ही, समय की भी बचत होगी। प्रदेश के आर्थिक विकास में एयरपोर्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दिल्ली के पास होने के साथ गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, मेरठ, अलीगढ़ आदि जनपदों के औद्योगिक विकास, फिल्म सिटी, मेडिकल डिवाइस आदि के निर्माण से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों, उद्यमियों, व्यापारियों व लोगों को विशेष लाभ होगा।
अधिकारियों का कहना है कि देश में पहली बार इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल कार्गो हब की अवधारणा के साथ एयरपोर्ट का निर्माण किया जा रहा है। इसके निर्माण से प्रदेश देश में बनी विभिन्न औद्योगिक, खाद्यान्न आदि वस्तुओं का निर्यात शीघ्रता से होगा। साथ ही, वस्तुओं के विनिमय आयात निर्यात/लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी और समय की बचत होगी। प्रदेश के विभिन्न उत्पादों के निर्यात के लिए कार्गो हब का निर्माण प्रदेश वासियों की आर्थिक प्रगति में बहुत सहायक होगा। एयरपोर्ट के साथ ही एयरो सिटी के निर्माण की योजना भी सरकार ने बनाई है। इस एयरपोर्ट के निर्माण से हास्पिटैलिटी और पर्यटन के क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। पर्यटन को बढ़ावा मिलने से देश की संस्कृति और आर्थिक प्रगति में मजबूती आएगी।
एयरपोर्ट के विकास कार्यों पर किया जा रहा मंथन
प्रदेश के मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी की अध्यक्षता में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (नियाल) की 12वीं बोर्ड बैठक मंगलवार को लोक भवन में हुई। इसमें नियाल ने एयरपोर्ट की प्रगति रिपोर्ट पेश की। नियाल के सीईओ डॉ. अरुण वीर सिंह ने बोर्ड के समक्ष एजेंडा प्रस्तुत किया। प्रस्तुतीकरण में उन्होंने बताया कि यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड ने डेवलपमेंट प्लान प्रस्तुत किया है, जिसका मंथन किया जा रहा है। कंपनी की ओर से एयरपोर्ट साइट पर बाउंड्री वाल और समतलीकरण का कार्य कराया जा रहा है। एयरपोर्ट के निर्माण के लिए नागर विमानन मंत्रालय की ओर से साइट व पर्यावरण क्लीयरेंस और गृह मंत्रालय व रक्षा मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया जा चुका है।
निर्माण की अवधि तीन वर्ष यानी 1095 दिन तय की गई है, जो 29 सितंबर 2024 है। बैठक में अपर मुख्य सचिव, नागरिक उड्डयन एसपी गोयल, अपर मुख्य सचिव औद्योगिक विकास अरविंद कुमार, सीईओ ग्रेटर नोएडा, सीईओ नोएडा ने वीडियो कांफ्रेंस से हिस्सा लिया। साथ ही, निदेशक नागरिक उड्डयन, सचिव वित्त, संयुक्त सचिव औद्योगिक विकास और नियाल के नोडल ऑफिसर शैलेंद्र भाटिया बैठक में मौजूद रहे।
दूसरे चरण में अधिग्रहण होने वाले गांवों के ग्रामीणों ने रखी मांगें
नोएडा एयरपोर्ट के दूसरे चरण में छह गांवों की 1365 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होगा। इसके लिए सर्वे का काम भी पूरा हो चुका है। इसके अलावा ग्रामीणों का कहना है कि जमीन के एवज में पहले से तय शर्तों के अलावा तीन नई मांगें भी पूरी करनी होंगी। इसमें टाउनशिप के अलावा पशुओं के लिए अलग से व्यवस्था और कामर्शियल प्रॉपर्टी जैसे छोटी दुकानों आदि के लिए जमीन दी जाए। जमीन अधिग्रहण से पहले जेवर के 6 गांवों के प्रभावित किसान परिवारों का सामाजिक समाघात निर्धारण (एसआईए) पर लोक सुनवाई का काम पूरा कर लिया गया है।

लखनऊ/ग्रेटर नोएडा। नोएडा एयरपोर्ट के निर्माण से लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी। साथ ही, समय की भी बचत होगी। प्रदेश के आर्थिक विकास में एयरपोर्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दिल्ली के पास होने के साथ गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, मेरठ, अलीगढ़ आदि जनपदों के औद्योगिक विकास, फिल्म सिटी, मेडिकल डिवाइस आदि के निर्माण से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों, उद्यमियों, व्यापारियों व लोगों को विशेष लाभ होगा।

अधिकारियों का कहना है कि देश में पहली बार इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल कार्गो हब की अवधारणा के साथ एयरपोर्ट का निर्माण किया जा रहा है। इसके निर्माण से प्रदेश देश में बनी विभिन्न औद्योगिक, खाद्यान्न आदि वस्तुओं का निर्यात शीघ्रता से होगा। साथ ही, वस्तुओं के विनिमय आयात निर्यात/लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी और समय की बचत होगी। प्रदेश के विभिन्न उत्पादों के निर्यात के लिए कार्गो हब का निर्माण प्रदेश वासियों की आर्थिक प्रगति में बहुत सहायक होगा। एयरपोर्ट के साथ ही एयरो सिटी के निर्माण की योजना भी सरकार ने बनाई है। इस एयरपोर्ट के निर्माण से हास्पिटैलिटी और पर्यटन के क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। पर्यटन को बढ़ावा मिलने से देश की संस्कृति और आर्थिक प्रगति में मजबूती आएगी।

एयरपोर्ट के विकास कार्यों पर किया जा रहा मंथन

प्रदेश के मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी की अध्यक्षता में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (नियाल) की 12वीं बोर्ड बैठक मंगलवार को लोक भवन में हुई। इसमें नियाल ने एयरपोर्ट की प्रगति रिपोर्ट पेश की। नियाल के सीईओ डॉ. अरुण वीर सिंह ने बोर्ड के समक्ष एजेंडा प्रस्तुत किया। प्रस्तुतीकरण में उन्होंने बताया कि यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड ने डेवलपमेंट प्लान प्रस्तुत किया है, जिसका मंथन किया जा रहा है। कंपनी की ओर से एयरपोर्ट साइट पर बाउंड्री वाल और समतलीकरण का कार्य कराया जा रहा है। एयरपोर्ट के निर्माण के लिए नागर विमानन मंत्रालय की ओर से साइट व पर्यावरण क्लीयरेंस और गृह मंत्रालय व रक्षा मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया जा चुका है।

निर्माण की अवधि तीन वर्ष यानी 1095 दिन तय की गई है, जो 29 सितंबर 2024 है। बैठक में अपर मुख्य सचिव, नागरिक उड्डयन एसपी गोयल, अपर मुख्य सचिव औद्योगिक विकास अरविंद कुमार, सीईओ ग्रेटर नोएडा, सीईओ नोएडा ने वीडियो कांफ्रेंस से हिस्सा लिया। साथ ही, निदेशक नागरिक उड्डयन, सचिव वित्त, संयुक्त सचिव औद्योगिक विकास और नियाल के नोडल ऑफिसर शैलेंद्र भाटिया बैठक में मौजूद रहे।

दूसरे चरण में अधिग्रहण होने वाले गांवों के ग्रामीणों ने रखी मांगें

नोएडा एयरपोर्ट के दूसरे चरण में छह गांवों की 1365 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होगा। इसके लिए सर्वे का काम भी पूरा हो चुका है। इसके अलावा ग्रामीणों का कहना है कि जमीन के एवज में पहले से तय शर्तों के अलावा तीन नई मांगें भी पूरी करनी होंगी। इसमें टाउनशिप के अलावा पशुओं के लिए अलग से व्यवस्था और कामर्शियल प्रॉपर्टी जैसे छोटी दुकानों आदि के लिए जमीन दी जाए। जमीन अधिग्रहण से पहले जेवर के 6 गांवों के प्रभावित किसान परिवारों का सामाजिक समाघात निर्धारण (एसआईए) पर लोक सुनवाई का काम पूरा कर लिया गया है।



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Come Here Too, Sir, The Garbage Is Burning In The Open – कभी इधर भी आइये जनाब, खुले में जल रहा है कूड़ा

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ग्रेनो वेस्ट स्थित बालक इंटर कॉलेज के पास कूड़े में आग लगने के बाद निकलता धुआं।
– फोटो : Grnoida

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ग्रेटर नोएडा। दिवाली के बाद से एनसीआर के शहरों में प्रदूषण की रोकथाम को लेकर हायतौबा मची है। तकरीबन सभी शहर अतिगंभीर (डार्क रेड व रेड) व गंभीर जोन में है। प्रदूषण से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट को भी दखल देना पड़ा। इसके बाद भी कार्रवाई व रोकथाम का काम सिर्फ औद्योगिक व आवासीय सेक्टर तक ही सीमित रह गया है। शहर के दूसरी छोर पर खुलेआम कूड़ा जलाया जा रहा है, इसकी भनक न तो प्रदूषण नियंत्रण विभाग को मिल रही है, न ही प्राधिकरण के अधिकारियों को। ऐसे में ग्रेटर नोएडा वेस्ट क्षेत्र में रहने वाले लोग सोशल मीडिया पर यह कहते नजर आ रहे हैं कि कभी इधर भी आइये जनाब, खुले में जल रहा है कूड़ा।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के बिसरख गांव के रहने वाले सरोज कुमार ने बताया कि गौतमबुद्ध बालक इंटर कॉलेज के समीप धुएं का गुबार देख वीडियो व फोटो सोशल मीडिया पर साझा कर प्राधिकरण व प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारियों को आइना दिखा रहे हैं। लोगों जानकारी दी है कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट में हर दिन कहीं न कहीं इस तरह से खुले में कूड़ा जलाया जा रहा है। शनिवार शाम गौतमबुद्ध बालक इंटर कॉलेज के समीप खुले में कूड़ा फेंक कर आग लगा दी गई। इससे उठता हुआ धूआं काफी दूर से ही दिखाई दे रहा था, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व प्राधिकरण के अधिकारियों को यह नहीं दिखा। प्राधिकरण व प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारी सिर्फ औद्योगिक व आवासीय सेक्टर में ही कूड़े जलाने व फेंकने की जांच कर अपनी कार्रवाई पूरी कर रहे हैं।
ग्रेटर नोएडा व नोएडा में वायु गुणवत्ता बेहद खराब
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की रविवार शाम चार बजे की बुलेटिन के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा का वायु गुणवत्ता सूचकांक 346 व नोएडा का 362 पर रहा, जिससे एनसीआर के प्रदूषित शहरों की सूची में ग्रेटर नोएडा छठे व नोएडा चौथे स्थान पर रहा, जबकि फरीदाबाद 412 एक्यूआई के साथ पहले व दिल्ली 405 एक्यूआई के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
कूड़ा में आग लगाने का मामला संज्ञान में नहीं हैं। हमारी टीम दो दिन पहले उस क्षेत्र का मुआयना करने गई थी, वहां एक कबाड़ी को पूर्व में पकड़ा जा चुका है। मामला संज्ञान में आता है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। – भुवन कुमार, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ग्रेटर नोएडा।

ग्रेटर नोएडा। दिवाली के बाद से एनसीआर के शहरों में प्रदूषण की रोकथाम को लेकर हायतौबा मची है। तकरीबन सभी शहर अतिगंभीर (डार्क रेड व रेड) व गंभीर जोन में है। प्रदूषण से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट को भी दखल देना पड़ा। इसके बाद भी कार्रवाई व रोकथाम का काम सिर्फ औद्योगिक व आवासीय सेक्टर तक ही सीमित रह गया है। शहर के दूसरी छोर पर खुलेआम कूड़ा जलाया जा रहा है, इसकी भनक न तो प्रदूषण नियंत्रण विभाग को मिल रही है, न ही प्राधिकरण के अधिकारियों को। ऐसे में ग्रेटर नोएडा वेस्ट क्षेत्र में रहने वाले लोग सोशल मीडिया पर यह कहते नजर आ रहे हैं कि कभी इधर भी आइये जनाब, खुले में जल रहा है कूड़ा।

ग्रेटर नोएडा वेस्ट के बिसरख गांव के रहने वाले सरोज कुमार ने बताया कि गौतमबुद्ध बालक इंटर कॉलेज के समीप धुएं का गुबार देख वीडियो व फोटो सोशल मीडिया पर साझा कर प्राधिकरण व प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारियों को आइना दिखा रहे हैं। लोगों जानकारी दी है कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट में हर दिन कहीं न कहीं इस तरह से खुले में कूड़ा जलाया जा रहा है। शनिवार शाम गौतमबुद्ध बालक इंटर कॉलेज के समीप खुले में कूड़ा फेंक कर आग लगा दी गई। इससे उठता हुआ धूआं काफी दूर से ही दिखाई दे रहा था, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व प्राधिकरण के अधिकारियों को यह नहीं दिखा। प्राधिकरण व प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारी सिर्फ औद्योगिक व आवासीय सेक्टर में ही कूड़े जलाने व फेंकने की जांच कर अपनी कार्रवाई पूरी कर रहे हैं।

ग्रेटर नोएडा व नोएडा में वायु गुणवत्ता बेहद खराब

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की रविवार शाम चार बजे की बुलेटिन के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा का वायु गुणवत्ता सूचकांक 346 व नोएडा का 362 पर रहा, जिससे एनसीआर के प्रदूषित शहरों की सूची में ग्रेटर नोएडा छठे व नोएडा चौथे स्थान पर रहा, जबकि फरीदाबाद 412 एक्यूआई के साथ पहले व दिल्ली 405 एक्यूआई के साथ दूसरे स्थान पर रहा।

कूड़ा में आग लगाने का मामला संज्ञान में नहीं हैं। हमारी टीम दो दिन पहले उस क्षेत्र का मुआयना करने गई थी, वहां एक कबाड़ी को पूर्व में पकड़ा जा चुका है। मामला संज्ञान में आता है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। – भुवन कुमार, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ग्रेटर नोएडा।



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