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‘maya’ Of Controversies: From Kanshi Ram’s Death To Calling Mulayam Government Unconstitutional – विवादों की ‘माया’ : कांशीराम की मृत्यु से लेकर मुलायम सरकार को असांविधानिक बताने तक

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सार

पूर्ण बहुमत की सरकार में मायावती नोटों की माला पहनने को लेकर काफी विवादों में घिरी थीं। शुरुआत मार्च 2010 में लखनऊ में आयोजित रैली में हुई। इस रैली में मायावती के उस समय खास और उनकी सरकार में लोक निर्माण मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने उन्हें नोटों की माला पहनाई तो विवाद खड़ा हो गया।

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मायावती सरकार भले ही पूर्ण बहुमत से आई, लेकिन पूरे कार्यकाल में विवादों ने सरकार को घेरे रखा। कांग्रेस की तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी का घर जलाने, प्रदेश के बंटवारे का एक लाइन में प्रस्ताव करने, नोटों की माला जैसे विवाद भी मायावती के गले पड़े रहे। मुलायम सरकार को राज्यपाल के अभिभाषण में असांविधानिक बताने पर उठे सांविधानिक सवालों पर घिरने से भी खुद को वह बचा नहीं पाईं। वहीं, बसपा के संस्थापक कांशीराम एवं अपने राजनीतिक गुरु के परिवार के आरोपों पर मायावती विराम नहीं लगा पाईं।

2003 से 2007 तक की मुलायम सरकार को अभिभाषण में कहा असांविधानिक
वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र भट्ट बताते हैं, सत्ता में आई बसपा सरकार ने एक अभूतपूर्व सांविधानिक विवाद को जन्म दिया। इस विवाद ने पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया। हुआ यह कि सरकार बनने के बाद जब विधानसभा का सत्र शुरू हुआ तो राज्यपाल के अभिभाषण में प्रदेश में 2003 से 2007 तक सत्तारूढ़ रही मुलायम सिंह यादव की सरकार को असांविधानिक सरकार कहा गया। इसको लेकर सदन में काफी हंगामा हुआ। भाजपा के हुकुम सिंह और सपा के नेता मो. आजम खां ने तमाम तर्क दिए। संशोधन भी रखे। पर, अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित करा लिया गया। ध्यान रहे कि अभिभाषण एक तरह से तत्कालीन सरकार का दस्तावेज ही होता है। प्रदेश की तत्कालीन सरकार ही उसे तैयार कराती है।

रीता के घर में आग पर घिरी सरकार
रीता बहुगुणा जोशी उस समय कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष थीं। लखनऊ के सरोजनी नायडू मार्ग यानी योजना भवन के पास स्थित उनके मकान में 17 जुलाई 2009 को कुछ लोगों ने आग लगा दी और लूटपाट की। रीता बहुगुणा ने इस घटना के लिए तत्कालीन मायावती सरकार पर निशाना साधा। साथ ही उस समय लखनऊ में नियुक्त कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी जिम्मेदार ठहराया। जोशी ने घटना के दौरान आवास पर तैनात पुलिस कर्मियों के मूक बने रहने का भी मामला उठाया। इस घटना में बसपा के तत्कालीन विधायक जितेंद्र सिंह बबलू एवं गन्ना संस्थान के चेयरमैन (दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री) रहे इंतिजार आब्दी घिरे। दरअसल, बलात्कार की घटनाओं पर बसपा के नेताओं के घिरने को लेकर रीता बहुत आक्रामक थीं। तभी सत्तारूढ़ दल बसपा की तरफ से पीड़ितों को आर्थिक मदद का तर्क दिया गया तो रीता ने मायावती को निशाना बनाते हुए बयान दिया। रीता का आरोप था कि सरकार के गलत कार्यों पर सवाल उठाने से चिढ़कर मायावती सरकार के इशारे पर उनके घर में आग लगवाई गई। बहरहाल, इस मामले में बबलू एवं आब्दी सहित कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। सरकार को इस मामले की सीबीसीआईडी जांच करानी पड़ी। जांच में लखनऊ में तैनात कुछ पुलिस अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मिली। पिछले दिनों यही बबलू भाजपा में शामिल कर लिया गया था लेकिन अब भाजपा की सांसद रीता बहुगुणा जोशी के विरोध पर उसकी सदस्यता रद्द करनी पड़ी।

पूर्ण बहुमत की सरकार में मायावती नोटों की माला पहनने को लेकर काफी विवादों में घिरी थीं। शुरुआत मार्च 2010 में लखनऊ में आयोजित रैली में हुई। इस रैली में मायावती के उस समय खास और उनकी सरकार में लोक निर्माण मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने उन्हें नोटों की माला पहनाई तो विवाद खड़ा हो गया। बताया जाता है कि माला में 1000 और 500 रुपये के नोट लगाए गए थे। यह माला थाईलैंड से डिजाइन कराई गई थी। लगभग 16 फीट लंबी माला में 21 लाख रुपये के नोट लगे थे। इस मामले में नसीमुद्दीन सिद्दीकी से आयकर विभाग ने पूछताछ भी की थी। पर, मायावती को नोटों की माला पहनाने का सिलसिला रुका नहीं।  

दो मिनट में बजट पारित, एक लाइन में प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव
प्रदेश 2012 के विधानसभा चुनाव की तरफ बढ़ रहा था। 2007 में सरकार बनने के साथ बुंदेलखंड की बदहाली को लेकर उनका केंद्र में उस समय सत्तारूढ़ कांग्रेस के नेता से तनातनी हो चुकी थी। बात नवंबर 2011 की है। विधानसभा सत्र चल रहा था। एक दिन सत्र में मायावती ने अचानक दो मिनट में पूरा बजट पारित कराया और हंगामे के बीच ही प्रदेश को चार हिस्सों (पूर्वांचल, बुंदेलखंड, अवध और पश्चिम) में बांटने का एक लाइन का प्रस्ताव रख उसे ध्वनिमत से पारित कराकर केंद्र सरकार को भेज दिया। सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। माया की मंशा विभाजन के मुद्दे पर कांग्रेस और अन्य दलों को घेरने की थी।

विधानसभा में सादे लिबास में घुसी पुलिस
दो मिनट में बजट पारित कराने और प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने के प्रस्ताव को लेकर सदन में हंगामा हो गया। वरिष्ठ पत्रकार योगेश श्रीवास्तव बताते हैं, विपक्ष धरने पर बैठ गया। विधायकों को मार्शल ने हटाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं उठे। हंगामे की खबर सुनकर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में विधानभवन के पास आ पहुंचे। सदन के साथ बाहर सड़क पर हंगामा शुरू हो गया। पुलिस ने कई बार लाठियां चलाईं, लेकिन सपा कार्यकर्ता नहीं हटे। कई लोग घायल हुए। बकौल श्रीवास्तव देर रात पुलिस लाइन से नए भर्ती हुए जवान सादे लिबास में बुलाए गए। काफी मशक्कत के बाद देर रात सपा के विधायकों को सदन से बाहर निकाला गया। वह बताते हैं कि यह अभूतपूर्व था।     
2004 में कल्याण बुलंदशहर से भाजपा के सांसद थे। 2009 में लागू हुए नए परिसीमन में यह सीट आरक्षित हो गई। कल्याण अपने चहेते को टिकट दिलाना चाहते थे। पर, भाजपा हाईकमान ने लोकसभा चुनाव से काफी पहले ही यहां से अशोक प्रधान को प्रत्याशी घोषित कर दिया। प्रधान उस समय खुर्जा से भाजपा के सांसद थे। कल्याण की उनसे नाराजगी थी। इसकी वजह 2007 में बुलंदशहर की लोध बहुल सीट डिबाई से उनके पुत्र राजवीर की पराजय थी। उपेक्षा से नाराज कल्याण ने 20 जनवरी 2009 को भाजपा को अलविदा कह दिया। फिर उन्होंने सपा नेता और अपने धुर विरोधी मुलायम सिंह से हाथ मिलाया। मुलायम ने उनके पुत्र राजवीर को सपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया। मुलायम के समर्थन से कल्याण 2009 में एटा सीट से लोकसभा का चुनाव लड़े और जीते। हालांकि, बाद में कल्याण और मुलायम में नहीं निभी। एक साल बीतते-बीतते कल्याण ने दूसरी बार अपनी नई पार्टी जन क्रांति पार्टी बनाने की घोषणा करते हुए मुलायम से नाता तोड़ दिया।

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मायावती सरकार भले ही पूर्ण बहुमत से आई, लेकिन पूरे कार्यकाल में विवादों ने सरकार को घेरे रखा। कांग्रेस की तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी का घर जलाने, प्रदेश के बंटवारे का एक लाइन में प्रस्ताव करने, नोटों की माला जैसे विवाद भी मायावती के गले पड़े रहे। मुलायम सरकार को राज्यपाल के अभिभाषण में असांविधानिक बताने पर उठे सांविधानिक सवालों पर घिरने से भी खुद को वह बचा नहीं पाईं। वहीं, बसपा के संस्थापक कांशीराम एवं अपने राजनीतिक गुरु के परिवार के आरोपों पर मायावती विराम नहीं लगा पाईं।

2003 से 2007 तक की मुलायम सरकार को अभिभाषण में कहा असांविधानिक

वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र भट्ट बताते हैं, सत्ता में आई बसपा सरकार ने एक अभूतपूर्व सांविधानिक विवाद को जन्म दिया। इस विवाद ने पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया। हुआ यह कि सरकार बनने के बाद जब विधानसभा का सत्र शुरू हुआ तो राज्यपाल के अभिभाषण में प्रदेश में 2003 से 2007 तक सत्तारूढ़ रही मुलायम सिंह यादव की सरकार को असांविधानिक सरकार कहा गया। इसको लेकर सदन में काफी हंगामा हुआ। भाजपा के हुकुम सिंह और सपा के नेता मो. आजम खां ने तमाम तर्क दिए। संशोधन भी रखे। पर, अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित करा लिया गया। ध्यान रहे कि अभिभाषण एक तरह से तत्कालीन सरकार का दस्तावेज ही होता है। प्रदेश की तत्कालीन सरकार ही उसे तैयार कराती है।

रीता के घर में आग पर घिरी सरकार

रीता बहुगुणा जोशी उस समय कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष थीं। लखनऊ के सरोजनी नायडू मार्ग यानी योजना भवन के पास स्थित उनके मकान में 17 जुलाई 2009 को कुछ लोगों ने आग लगा दी और लूटपाट की। रीता बहुगुणा ने इस घटना के लिए तत्कालीन मायावती सरकार पर निशाना साधा। साथ ही उस समय लखनऊ में नियुक्त कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी जिम्मेदार ठहराया। जोशी ने घटना के दौरान आवास पर तैनात पुलिस कर्मियों के मूक बने रहने का भी मामला उठाया। इस घटना में बसपा के तत्कालीन विधायक जितेंद्र सिंह बबलू एवं गन्ना संस्थान के चेयरमैन (दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री) रहे इंतिजार आब्दी घिरे। दरअसल, बलात्कार की घटनाओं पर बसपा के नेताओं के घिरने को लेकर रीता बहुत आक्रामक थीं। तभी सत्तारूढ़ दल बसपा की तरफ से पीड़ितों को आर्थिक मदद का तर्क दिया गया तो रीता ने मायावती को निशाना बनाते हुए बयान दिया। रीता का आरोप था कि सरकार के गलत कार्यों पर सवाल उठाने से चिढ़कर मायावती सरकार के इशारे पर उनके घर में आग लगवाई गई। बहरहाल, इस मामले में बबलू एवं आब्दी सहित कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। सरकार को इस मामले की सीबीसीआईडी जांच करानी पड़ी। जांच में लखनऊ में तैनात कुछ पुलिस अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मिली। पिछले दिनों यही बबलू भाजपा में शामिल कर लिया गया था लेकिन अब भाजपा की सांसद रीता बहुगुणा जोशी के विरोध पर उसकी सदस्यता रद्द करनी पड़ी।



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The Wife Of The Main Accused In The Bikru Scandal Made Serious Allegations Against The Government – लखनऊ : बिकरू कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे की पत्नी ने लगाया सरकार पर गंभीर आरोप

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अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 26 Jan 2022 12:57 AM IST

सार

ऋचा दुबे ने कहा कि दो साल बाद भी नहीं बन सका पति का मृत्यु प्रमाण पत्र, फर्जी मुकदमे में फंसाने की कोशिश जारी।

विकास दुबे की पत्नी ऋचा दुबे।
– फोटो : amar ujala

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कानपुर के बिकरू कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे की पत्नी ऋचा दुबे ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है। ऋचा ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी पति के मौत के दो साल बाद भी उनका मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बना रहे है। वहीं पूरे परिवार को फर्जी मुकदमें में फंसाने की साजिश की जा रही है। आरोप है कि सरकार उनके मौलिक अधिकार का हनन कर रही है। ऋचा दुबे ने यह बात कृष्णानगर स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही।

ऋचा ने कहा कि उनके पति विकास दुबे बिकरू कांड के मुख्य आरोपी थे। जिनको एसटीएफ ने मुठभेड़ में मार गिराया था। इसके बाद भी प्रदेश सरकार हमारे परिवार के मौलिक अधिकार का हनन करने पर तुली है। सरकार के इशारे पर दो साल बाद भी पति के मृत्यु का प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है। अधिकारियों से मुलाकात करने पर जवाब मिलता हेकि मामला सरकार से जुड़ा है। आप वहीं संपर्क करें।

ऋचा ने कहा कि कभी विकास के साझीदार रहे राजीव बाजपेई अब भाजपा में शामिल हो गये है। राजीव ने उनकी चौबेपुर की जमीनों पर कब्जा कर लिया है। जिसकी सुनवाई भी पुलिस व प्रशासन नहीं कर रही है। ऋचा का आरोप है कि कुछ अराजक तत्व उनके घर पर आकर धमकी देते हैं। जिसके कारण वह लखनऊ में चार महीने बाद आई हैं। आए दिन परिवार के लोगों को धमकाया जा रहा है। वहीं सरकार ने हमारी सारी संपत्ति भी जब्त कर रही है। आजीविका के लिए दर दर भटकना पड़ रहा है।

विस्तार

कानपुर के बिकरू कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे की पत्नी ऋचा दुबे ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है। ऋचा ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी पति के मौत के दो साल बाद भी उनका मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बना रहे है। वहीं पूरे परिवार को फर्जी मुकदमें में फंसाने की साजिश की जा रही है। आरोप है कि सरकार उनके मौलिक अधिकार का हनन कर रही है। ऋचा दुबे ने यह बात कृष्णानगर स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही।

ऋचा ने कहा कि उनके पति विकास दुबे बिकरू कांड के मुख्य आरोपी थे। जिनको एसटीएफ ने मुठभेड़ में मार गिराया था। इसके बाद भी प्रदेश सरकार हमारे परिवार के मौलिक अधिकार का हनन करने पर तुली है। सरकार के इशारे पर दो साल बाद भी पति के मृत्यु का प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है। अधिकारियों से मुलाकात करने पर जवाब मिलता हेकि मामला सरकार से जुड़ा है। आप वहीं संपर्क करें।

ऋचा ने कहा कि कभी विकास के साझीदार रहे राजीव बाजपेई अब भाजपा में शामिल हो गये है। राजीव ने उनकी चौबेपुर की जमीनों पर कब्जा कर लिया है। जिसकी सुनवाई भी पुलिस व प्रशासन नहीं कर रही है। ऋचा का आरोप है कि कुछ अराजक तत्व उनके घर पर आकर धमकी देते हैं। जिसके कारण वह लखनऊ में चार महीने बाद आई हैं। आए दिन परिवार के लोगों को धमकाया जा रहा है। वहीं सरकार ने हमारी सारी संपत्ति भी जब्त कर रही है। आजीविका के लिए दर दर भटकना पड़ रहा है।



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Lucknow: Income Tax Raids On Six Locations Of Hawala Traders, Three Crore Recovered, 65 Lakh Rupees Were Sent Through Hawala In Gonda – लखनऊ : हवाला कारोबारियों के छह ठिकानों पर आयकर छापा, तीन करोड़ बरामद, गोंडा में हवाला के जरिये भेजे गए थे 65 लाख रुपये 

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्‍तव
Updated Mon, 24 Jan 2022 12:59 AM IST

सार

आयकर विभाग ने बीते शनिवार देर रात हवाला कारोबारियों के आधा दर्जन से अधिक ठिकानों पर छापामारी की। आयकर अफसरोें की टीम ने ये कार्रवाई गोंडा में 21 जनवरी को 65 लाख रुपये की नकदी बरामद होने के बाद शुरू की है।

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आयकर विभाग ने बीते शनिवार देर रात हवाला कारोबारियों के आधा दर्जन से अधिक ठिकानों पर छापामारी की। आयकर अफसरोें की टीम ने ये कार्रवाई गोंडा में 21 जनवरी को 65 लाख रुपये की नकदी बरामद होने के बाद शुरू की है। रविवार शाम तक की जांच में लगभग तीन करोड़ रुपये की नकदी बरामद होने की बात सामने आयी है। हालांकि आयकर विभाग ने अभी तक इस सिलसिले में आधिकारिक जानकारी नहीं दी।

सूत्रों ने बताया कि डिप्टी कमिश्नर के नेतृत्व में यह कार्रवाई आयकर विभाग की जांच इकाई की टीम ने बीते शनिवार को पुराने शहर स्थित रकाबगंज के रुकमणी धर्मशाला के पास रहने वाले  हवाला कारोबारियों के ठिकानों (घर एवं दुकान) पर शुरू की थी। जो शनिवार पूरी रात एवं रविवार को पूरे दिन चली। इस जांच के दौरान एक कारोबारी के घर से लगभग 30 लाख एवं दूसरे के घर से 2.75 करोड़ रुपये का कैश मिला। आयकर अफसरों ने भारी तादाद में घर से बरामद कैश पर कारोबारियों से स्रोत का साक्ष्य मांगा जो नहीं दे सके। तो इस कैश को अफसरों ने अपनी सुपुर्दगी में ले लिया है। हालांकि आयकर विभाग ने आधिकारिक रूप से पत्रकारों को कोई जानकारी नहीं दी। जबकि आयकर अफसरों की टीम जांच की कार्रवाई रविवार देर रात तक करती रही। 

हवाला के  धंधे का गढ़ यहियागंज
राजधानी का यहियागंज आयकर विभाग में पहले से ही चर्चित है। ये यहियागंज कुछ कारोबारियों के चलते हवाला के धंधे का गढ़ है। आयकर विभाग ने इससे पहले भी नोट बंदी के दौरान 500 एवं 1000 रुपये के पुराने नोट बदलने के खेल का खुलासा होने पर अफसरों की टीम ने तब भी छापामारी की थी। गोंडा में चावल की बोरी में भर करके ले जा रहे 65 लाख की बरामदगी के बाद यहियागंज एवं रकाबगंज एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है।   

ये था मामला
उपजिलाधिकारी एवं उड़न दस्ते ने बीते 21 जनवरी को अभियान के दौरान दो वाहनों से 65 लाख रुपये की नकदी एवं चुनाव सामग्री बरामद की थी। पुुलिस अधीक्षक संतोष कुमार मिश्र के मुताबिक वाहन में सवार कन्हैया अग्रवाल एवं चंद अग्रवाल निवासी बढ़नी सिद्धार्थनगर बरामद रुपये का कोई साक्ष्य नहीं दे सके। टीम ने इस रकम को हवाला का मानते हुए जब्त कर लिया था।

विस्तार

आयकर विभाग ने बीते शनिवार देर रात हवाला कारोबारियों के आधा दर्जन से अधिक ठिकानों पर छापामारी की। आयकर अफसरोें की टीम ने ये कार्रवाई गोंडा में 21 जनवरी को 65 लाख रुपये की नकदी बरामद होने के बाद शुरू की है। रविवार शाम तक की जांच में लगभग तीन करोड़ रुपये की नकदी बरामद होने की बात सामने आयी है। हालांकि आयकर विभाग ने अभी तक इस सिलसिले में आधिकारिक जानकारी नहीं दी।

सूत्रों ने बताया कि डिप्टी कमिश्नर के नेतृत्व में यह कार्रवाई आयकर विभाग की जांच इकाई की टीम ने बीते शनिवार को पुराने शहर स्थित रकाबगंज के रुकमणी धर्मशाला के पास रहने वाले  हवाला कारोबारियों के ठिकानों (घर एवं दुकान) पर शुरू की थी। जो शनिवार पूरी रात एवं रविवार को पूरे दिन चली। इस जांच के दौरान एक कारोबारी के घर से लगभग 30 लाख एवं दूसरे के घर से 2.75 करोड़ रुपये का कैश मिला। आयकर अफसरों ने भारी तादाद में घर से बरामद कैश पर कारोबारियों से स्रोत का साक्ष्य मांगा जो नहीं दे सके। तो इस कैश को अफसरों ने अपनी सुपुर्दगी में ले लिया है। हालांकि आयकर विभाग ने आधिकारिक रूप से पत्रकारों को कोई जानकारी नहीं दी। जबकि आयकर अफसरों की टीम जांच की कार्रवाई रविवार देर रात तक करती रही। 

हवाला के  धंधे का गढ़ यहियागंज

राजधानी का यहियागंज आयकर विभाग में पहले से ही चर्चित है। ये यहियागंज कुछ कारोबारियों के चलते हवाला के धंधे का गढ़ है। आयकर विभाग ने इससे पहले भी नोट बंदी के दौरान 500 एवं 1000 रुपये के पुराने नोट बदलने के खेल का खुलासा होने पर अफसरों की टीम ने तब भी छापामारी की थी। गोंडा में चावल की बोरी में भर करके ले जा रहे 65 लाख की बरामदगी के बाद यहियागंज एवं रकाबगंज एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है।   

ये था मामला

उपजिलाधिकारी एवं उड़न दस्ते ने बीते 21 जनवरी को अभियान के दौरान दो वाहनों से 65 लाख रुपये की नकदी एवं चुनाव सामग्री बरामद की थी। पुुलिस अधीक्षक संतोष कुमार मिश्र के मुताबिक वाहन में सवार कन्हैया अग्रवाल एवं चंद अग्रवाल निवासी बढ़नी सिद्धार्थनगर बरामद रुपये का कोई साक्ष्य नहीं दे सके। टीम ने इस रकम को हवाला का मानते हुए जब्त कर लिया था।



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Cm Yogi Adityanath Flags Off Prachar Rath In Lucknow. – Up Election 2022: मुख्यमंत्री योगी ने रवाना किया प्रचार रथ, बोले- हमारी सरकार में तुष्टिकरण के लिए कोई जगह नहीं

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अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sat, 22 Jan 2022 12:12 PM IST

सार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को हरी झंडी दिखाकर प्रचार रथ को रवाना किया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार में तुष्टिकरण की कोई जगह नहीं है। हमारी सरकार में कोई पलायन नहीं हुआ है।

प्रचार रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
– फोटो : amar ujala

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भाजपा के प्रचार रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री केशव मौर्या ने कहा कि यूपी में अब कोई माई का लाल पलायन नहीं करा सकता इसलिए जनता की यही पुकार यूपी मांगे बीजेपी सरकार। उन्होंने कहा कि हम सपा बसपा के कुशासन को जनता के बीच ले जाएंगे और जनता में समर्थन मांगेंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी में पहले लोगों को पलायन कराया जाता था लेकिन अब अपराधी प्लायन कर रहे है। उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण के लिए हमारी सरकार में कोई जगह नहीं है।

विस्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भाजपा के प्रचार रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री केशव मौर्या ने कहा कि यूपी में अब कोई माई का लाल पलायन नहीं करा सकता इसलिए जनता की यही पुकार यूपी मांगे बीजेपी सरकार। उन्होंने कहा कि हम सपा बसपा के कुशासन को जनता के बीच ले जाएंगे और जनता में समर्थन मांगेंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी में पहले लोगों को पलायन कराया जाता था लेकिन अब अपराधी प्लायन कर रहे है। उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण के लिए हमारी सरकार में कोई जगह नहीं है।



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