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Jhansi: Attack Of Sp President Akhilesh – Up Government Gets Maximum Notice On Fake Encounter – झांसी: सपा अध्यक्ष अखिलेश का हमला- फर्जी एनकाउंटर पर सबसे ज्यादा नोटिस यूपी सरकार को मिले

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एएनआई, झांसी
Published by: अनुराग सक्सेना
Updated Fri, 03 Dec 2021 11:32 AM IST

झांसी में सपा प्रमुख अखिलेश यादव
– फोटो : ANI

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यूपी विधानसभा चुनाव से पहले अपना विजय यात्रा लेकर गुरुवार को झांसी पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को कहा कि फर्जी एनकाउंटर के मामले में देश में सबसे ज्यादा नोटिस उत्तर प्रदेश सरकार को मिले हैं।

सपा अध्यक्ष ने कहा कि भारत सरकार के आंकड़ों में कम से कम यह बताना चाहिए कि भारत में महिलाओं और बेटियों पर सबसे ज्यादा अन्याय यूपी में है। फर्जी एनकाउंटर में भी सबसे ज्यादा नोटिस यूपी सरकार को मिले हैं। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में भाजपा के लिए दरवाजे बंद हो गए हैं। यहां की जनता भाजपा को जीरो पर लाएगी।

उन्होंने कहा  कि बुंदेलखंड में चल रहे विकास कार्य इस सरकार में रोक दिए गए हैं। यहां के लोगों का कोई ध्यान नहीं रखा गया।

यूपी विधानसभा चुनाव से पहले अपना विजय यात्रा लेकर गुरुवार को झांसी पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को कहा कि फर्जी एनकाउंटर के मामले में देश में सबसे ज्यादा नोटिस उत्तर प्रदेश सरकार को मिले हैं।

सपा अध्यक्ष ने कहा कि भारत सरकार के आंकड़ों में कम से कम यह बताना चाहिए कि भारत में महिलाओं और बेटियों पर सबसे ज्यादा अन्याय यूपी में है। फर्जी एनकाउंटर में भी सबसे ज्यादा नोटिस यूपी सरकार को मिले हैं। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में भाजपा के लिए दरवाजे बंद हो गए हैं। यहां की जनता भाजपा को जीरो पर लाएगी।

उन्होंने कहा  कि बुंदेलखंड में चल रहे विकास कार्य इस सरकार में रोक दिए गए हैं। यहां के लोगों का कोई ध्यान नहीं रखा गया।



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Republic Day 2022 Celebrated At Jhansi And Lalitpur – Republic Day 2022: झांसी और ललितपुर में मंडलायुक्त और डीएम ने ली परेड की सलामी, मनाया गणतंत्र दिवस

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अमर उजाला नेटवर्क, झांसी/ललितपुर
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Wed, 26 Jan 2022 12:33 PM IST

सार

झांसी के पुलिस लाइन में भी मंडलायुक्त अजय शंकर पांडेय महिला पुलिस परेड की सलामी ली। वहीं ललितपुर में बुधवार को गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया गया।

झांसी और ललितपुर में गणतंत्र दिवस की परेड (बाएं से दाएं)
– फोटो : अमर उजाला

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राष्ट्र आज अपना 73वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस मौके पर देश में जिलास्तर पर भी गणतंत्र दिवस मनाया गया। स्थानीय स्तर पर मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों ने परेड की सलामी ली और धूमधाम से गणतंत्र का जश्न मनाया गया।

झांसी के पुलिस लाइन में भी मंडलायुक्त अजय शंकर पांडेय महिला पुलिस परेड की सलामी ली। वहीं ललितपुर में बुधवार को गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया गया। पुलिस लाइन में डीएम आलोक सिंह ने ध्वजारोहण कर मार्चपास्ट की सलामी ली। इस मौके पर पुलिस कर्मियों को प्रशस्त पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जिला जज चंद्रोदय कुमार ,एसपी निखिल पाठक सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

विस्तार

राष्ट्र आज अपना 73वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस मौके पर देश में जिलास्तर पर भी गणतंत्र दिवस मनाया गया। स्थानीय स्तर पर मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों ने परेड की सलामी ली और धूमधाम से गणतंत्र का जश्न मनाया गया।

झांसी के पुलिस लाइन में भी मंडलायुक्त अजय शंकर पांडेय महिला पुलिस परेड की सलामी ली। वहीं ललितपुर में बुधवार को गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया गया। पुलिस लाइन में डीएम आलोक सिंह ने ध्वजारोहण कर मार्चपास्ट की सलामी ली। इस मौके पर पुलिस कर्मियों को प्रशस्त पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जिला जज चंद्रोदय कुमार ,एसपी निखिल पाठक सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।



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Women’s Employees Will Be Deployed At Urban Polling Stations – शहरी मतदान केंद्रों पर होगी महिला कर्मचारियों की तैनाती

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झांसी। विधानसभा चुनाव में 900 महिला कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इनकी तैनाती दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित मतदान केंद्रों में नहीं की जाएगी, बल्कि शहरी बूथों पर इन महिला कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा।
जिले में तीसरे चरण में 20 फरवरी को मतदान होगा। चुनाव में केंद्र व राज्य के अलग-अलग विभागों के 9,020 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इनमें 900 महिला कर्मचारी हैं। इन महिला कर्मचारियों की ड्यूटी चारों विधानसभाओं के नगरीय क्षेत्रों में स्थित बूथों पर की जाएगी। इसके अलावा महिलाओं को मतदान के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से प्रत्येक विधानसभा में दो-दो महिला बूथ बनाए जा रहे हैं। इन बूथों पर पीठासीन अधिकारियों से लेकर मतदान कार्मिक तक महिलाएं होंगी। बबीना विधानसभा में ये बूथ शाहलाल चंद्र जैन आदर्श जूनियर हाईस्कूल चिरगांव व बड़ागांव इंटर कॉलेज, झांसी नगर में पूर्व माध्यमिक विद्यालय शिक्षा भवन व बुंदेलखंड महाविद्यालय, मऊरानीपुर में नगर पालिका कन्या इंटर कॉलेज व राजकीय बालिका इंटर कॉलेज तथा गरौठा विधानसभा में प्राथमिक विद्यालय प्राचीन एरच व कन्या प्राथमिक विद्यालय प्राचीन गुरसराय में बनाए गए हैं।

झांसी। विधानसभा चुनाव में 900 महिला कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इनकी तैनाती दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित मतदान केंद्रों में नहीं की जाएगी, बल्कि शहरी बूथों पर इन महिला कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा।

जिले में तीसरे चरण में 20 फरवरी को मतदान होगा। चुनाव में केंद्र व राज्य के अलग-अलग विभागों के 9,020 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इनमें 900 महिला कर्मचारी हैं। इन महिला कर्मचारियों की ड्यूटी चारों विधानसभाओं के नगरीय क्षेत्रों में स्थित बूथों पर की जाएगी। इसके अलावा महिलाओं को मतदान के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से प्रत्येक विधानसभा में दो-दो महिला बूथ बनाए जा रहे हैं। इन बूथों पर पीठासीन अधिकारियों से लेकर मतदान कार्मिक तक महिलाएं होंगी। बबीना विधानसभा में ये बूथ शाहलाल चंद्र जैन आदर्श जूनियर हाईस्कूल चिरगांव व बड़ागांव इंटर कॉलेज, झांसी नगर में पूर्व माध्यमिक विद्यालय शिक्षा भवन व बुंदेलखंड महाविद्यालय, मऊरानीपुर में नगर पालिका कन्या इंटर कॉलेज व राजकीय बालिका इंटर कॉलेज तथा गरौठा विधानसभा में प्राथमिक विद्यालय प्राचीन एरच व कन्या प्राथमिक विद्यालय प्राचीन गुरसराय में बनाए गए हैं।



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Everything Has Been Done In The Names Of Sons, Children Do Not Talk Till Now – सब कुछ कर दिया बेटों के नाम, अब बात तक नहीं करती संतान

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झांसी। अपने बच्चों के भरण-पोषण के लिए लोग क्या कुछ नहीं करते। बच्चों की जरूरतें पूरी करने के लिए अपना पेट काटने से भी पीछे नहीं हटते। लेकिन, बुढ़ापे में यही संतान साथ छोड़ देती है। संपत्ति हासिल करने के बाद माता-पिता को बेगाना बना दिया जाता है। सेवा करना तो दूर की बात उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट तक की जाती है। कुछ ऐसे ही मामले ‘माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम – 2007’ के तहत जिले में बने ट्रिब्यूनल में पहुंचे हैं। यहां 103 बुजुर्गों ने न्याय की गुहार लगाई है।
अपने उत्तराधिकारियों से पीड़ित बुजुर्गों की मदद के लिए जिले में तहसील स्तर पर वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं, जिनके पीठासीन अधिकारी संबंधित तहसील के उप जिला मजिस्ट्रेट हैं। जिले के पांचों तहसीलों के ट्रिब्यूनल में 103 बुजुर्गों ने मामले दायर कर रखे हैं। इन मुकदमों में बुुजुर्गों की ओर से दरख्वास्त दी गई है कि उनके पुत्र-पुत्री उनकी बिलकुल देखभाल नहीं करते हैं। दवा-इलाज का इंतजाम तो दूर की बात खाने-पीने तक का बंदोबस्त नहीं करते हैं। यहां तक कि आए दिन गाली-गलौज करते हैं और हाथ उठाने से भी गुरेज नहीं करते। मुकदमों में ज्यादातर बुजुर्गों की ओर से बताया गया कि वे अपनी संपत्ति बच्चों के नाम कर चुके हैं। अब उनके पास आमदनी का कोई जरिया नहीं है। ऐसे में वे पूरी तरह से बच्चों पर ही आश्रित हैं, लेकिन वे उनका बिल्कुल ख्याल नहीं रख रहे हैं।
केस – 1
बीमार होने पर पूछते तक नहीं हैं
झांसी। महानगर के एक बुजुर्ग द्वारा दाखिल किए गए मुकदमे में बताया गया है कि उन्होंने अपना सारा कारोबार अपने पुत्र को सौंप दिया। इसके बाद से पुत्र का रवैया उनके प्रति एकदम बदल गया। देखभाल करना तो दूर की बात बेटा महीनों बात भी नहीं करता है। बीमार होने पर भी नहीं पूछता है। बुजुर्ग ने ट्रिब्यूनल से देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित करने और पुत्र से हर माह निश्चित धनराशि दिलाने की मांग की है।
केस – 2
अलग कमरे में पड़े रहते हैं
झांसी। ट्रिब्यूनल में एक बुजुर्ग दंपत्ती द्वारा दाखिल किए गए मुकदमे में बताया कि जिस घर को उन्होंने मेहनत से बनाया था, अब वे उसी में ही बेगाने बनकर रह रहे हैं। बच्चों ने घर में अलग कमरा दे रखा है। कोई हाल-चाल तक लेने नहीं आता। जरूरत पर थोड़े से पैसों के लिए बच्चों के सामने हाथ फैलाने पड़ते हैं। बुजुर्ग दंपती ने ट्रिब्यूनल से बच्चों से मकान खाली कराने की दरख्वास्त की है।
ये है एक्ट में
———–
– जो वरिष्ठ नागरिक स्वयं का भरण – पोषण करने में असमर्थ हैं, वे संतान से भरण पोषण का दावा कर सकते हैं।
– संतानहीन वरिष्ठ नागरिक उन संबंधियों के विरुद्ध दावा कर सकते हैं, जो उनकी संपत्ति के उत्तराधिकारी हैं।
– आवेदन उप जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष किया जाता है।
– भरण – पोषण का भुगतान न करने वाली संतानों को एक महीने के कारावास और माता-पिता का परित्याग करने वाली संतानों को तीन माह के कारावास की सजा का प्रावधान है।
– बुजुर्गों के पक्ष में फैसला आने पर संतान हाईकोर्ट में ही अपील कर सकती है, जबकि संतानों के पक्ष में फैसला आने पर बुजुर्ग जिला मजिस्ट्रेट की अदालत में अपील कर सकते हैं।
– वादी को अधिवक्ता की आवश्यकता नहीं होती, सादा कागज पर ही प्रार्थना पत्र दिया जा सकता है।
बुजुर्गों की मदद के लिए माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम बनाया गया है। इन मुकदमों की सुनवाई पूरी संवेदनशीलता के साथ तेजी से की जाती है।
– क्षितिज द्विवेदी, उप जिला मजिस्ट्रेट

झांसी। अपने बच्चों के भरण-पोषण के लिए लोग क्या कुछ नहीं करते। बच्चों की जरूरतें पूरी करने के लिए अपना पेट काटने से भी पीछे नहीं हटते। लेकिन, बुढ़ापे में यही संतान साथ छोड़ देती है। संपत्ति हासिल करने के बाद माता-पिता को बेगाना बना दिया जाता है। सेवा करना तो दूर की बात उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट तक की जाती है। कुछ ऐसे ही मामले ‘माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम – 2007’ के तहत जिले में बने ट्रिब्यूनल में पहुंचे हैं। यहां 103 बुजुर्गों ने न्याय की गुहार लगाई है।

अपने उत्तराधिकारियों से पीड़ित बुजुर्गों की मदद के लिए जिले में तहसील स्तर पर वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं, जिनके पीठासीन अधिकारी संबंधित तहसील के उप जिला मजिस्ट्रेट हैं। जिले के पांचों तहसीलों के ट्रिब्यूनल में 103 बुजुर्गों ने मामले दायर कर रखे हैं। इन मुकदमों में बुुजुर्गों की ओर से दरख्वास्त दी गई है कि उनके पुत्र-पुत्री उनकी बिलकुल देखभाल नहीं करते हैं। दवा-इलाज का इंतजाम तो दूर की बात खाने-पीने तक का बंदोबस्त नहीं करते हैं। यहां तक कि आए दिन गाली-गलौज करते हैं और हाथ उठाने से भी गुरेज नहीं करते। मुकदमों में ज्यादातर बुजुर्गों की ओर से बताया गया कि वे अपनी संपत्ति बच्चों के नाम कर चुके हैं। अब उनके पास आमदनी का कोई जरिया नहीं है। ऐसे में वे पूरी तरह से बच्चों पर ही आश्रित हैं, लेकिन वे उनका बिल्कुल ख्याल नहीं रख रहे हैं।

केस – 1

बीमार होने पर पूछते तक नहीं हैं

झांसी। महानगर के एक बुजुर्ग द्वारा दाखिल किए गए मुकदमे में बताया गया है कि उन्होंने अपना सारा कारोबार अपने पुत्र को सौंप दिया। इसके बाद से पुत्र का रवैया उनके प्रति एकदम बदल गया। देखभाल करना तो दूर की बात बेटा महीनों बात भी नहीं करता है। बीमार होने पर भी नहीं पूछता है। बुजुर्ग ने ट्रिब्यूनल से देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित करने और पुत्र से हर माह निश्चित धनराशि दिलाने की मांग की है।

केस – 2

अलग कमरे में पड़े रहते हैं

झांसी। ट्रिब्यूनल में एक बुजुर्ग दंपत्ती द्वारा दाखिल किए गए मुकदमे में बताया कि जिस घर को उन्होंने मेहनत से बनाया था, अब वे उसी में ही बेगाने बनकर रह रहे हैं। बच्चों ने घर में अलग कमरा दे रखा है। कोई हाल-चाल तक लेने नहीं आता। जरूरत पर थोड़े से पैसों के लिए बच्चों के सामने हाथ फैलाने पड़ते हैं। बुजुर्ग दंपती ने ट्रिब्यूनल से बच्चों से मकान खाली कराने की दरख्वास्त की है।

ये है एक्ट में

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– जो वरिष्ठ नागरिक स्वयं का भरण – पोषण करने में असमर्थ हैं, वे संतान से भरण पोषण का दावा कर सकते हैं।

– संतानहीन वरिष्ठ नागरिक उन संबंधियों के विरुद्ध दावा कर सकते हैं, जो उनकी संपत्ति के उत्तराधिकारी हैं।

– आवेदन उप जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष किया जाता है।

– भरण – पोषण का भुगतान न करने वाली संतानों को एक महीने के कारावास और माता-पिता का परित्याग करने वाली संतानों को तीन माह के कारावास की सजा का प्रावधान है।

– बुजुर्गों के पक्ष में फैसला आने पर संतान हाईकोर्ट में ही अपील कर सकती है, जबकि संतानों के पक्ष में फैसला आने पर बुजुर्ग जिला मजिस्ट्रेट की अदालत में अपील कर सकते हैं।

– वादी को अधिवक्ता की आवश्यकता नहीं होती, सादा कागज पर ही प्रार्थना पत्र दिया जा सकता है।

बुजुर्गों की मदद के लिए माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम बनाया गया है। इन मुकदमों की सुनवाई पूरी संवेदनशीलता के साथ तेजी से की जाती है।

– क्षितिज द्विवेदी, उप जिला मजिस्ट्रेट



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