Connect with us

Haridwar

Uttarakhand News: Madhya Pradesh Cm Shivraj Singh Chauhan Haridwar Visit Today – हरिद्वार: पतंजलि पहुंचे सीएम शिवराज सिंह चौहान, कहा- मध्य प्रदेश में होगा योग आयोग का गठन

Published

on


सार

सीएम चौहान पतंजलि योगपीठ भी जाएंगे। यहां वे राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘वैश्विक चुनौतियों का सनातन, समाधान-एकात्म बोध’ में भाग लेंगे।

सीएम शिवराज सिंह चौहान से मिले मुख्मंत्री धामी
– फोटो : अमर उजाला

ख़बर सुनें

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वैभवशाली और गौरवशाली संपन्न भारत का निर्माण हो रहा है। उसके निर्माण के लिए संन्यासियों ने योग, आयुर्वेद, शिक्षा और अध्यात्म के माध्यम से देश ही नहीं पूरे विश्व में क्रांति की है। उन्होंने कहा कि योग की शिक्षा के लिए मध्य प्रदेश में अभियान चलाया जाएगा और प्रदेश में योग आयोग का गठन किया जाएगा। 

सीएम शिवराज सिंह चौहान बृहस्पतिवार को आजादी के अमृत महोत्सव पर पतंजलि योगपीठ में ‘वैश्विक चुनौतियों का सनातन समाधान-एकात्म बोध’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं 75 करोड़ सूर्य नमस्कार संकल्प कार्यक्रम की वेबसाइट के लोकार्पण समारोह में बोल रहे थे। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि योग ऋषि स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने योग, आयुर्वेद, भारतीय संस्कृति, वैदिक शिक्षा को विश्व पटल पर स्थापित किया है। स्वदेशी से आत्मनिर्भर भारत के नव-निर्माण के लिए योग व उद्योग के माध्यम से पतंजलि लाखों किसानों एवं युवाओं को रोजगार प्रदान कर रहा है। 

इस मौके पर योग गुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि कहा कि देश में योग शिक्षा को आंशिक रूप से लागू करने के लिए टुकड़ों में प्रयास हो रहे थे, लेकिन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने योग को व्यापक रूप से शिक्षा का अंग बनाने की पहल की है। 

आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि से योग के महाअभियान का सूत्रपात होने जा रहा है। मध्य प्रदेश सरकार संस्कृति, परंपरा के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए बेहतर कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रदेश के स्कूलों में योग शिक्षा लागू कर गांव-गांव तक योग के प्रचार-प्रसार की प्रतिबद्धता दोहराई है। उन्होंने कहा कि आज जीवन में विभिन्न प्रकार की समस्याएं हैं। यदि हम सनातन परंपराओं के आश्रय और जड़ को पकड़कर रखेंगे तो समस्याओं का समाधान वहीं से मिलेगा।

शांतिकुंज के स्वर्ण जयंती वर्ष पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान परिवार समेत देव संस्कृति विश्वविद्यालय पहुंचे। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देव संस्कृति विश्वविद्यालय की शिक्षा जीवन बदलने का अभियान है। 

मृत्युंजय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वह गायत्री परिवार के सदस्य के रूप में हरिद्वार आए हैं। उन्होंने कहा कि हम उस परंपरा से आते हैं, जहां हजारों वर्ष पहले ऋषियों-मुनियों के तप से भारत विश्व गुरु बना। उन्होंने कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का प्रथम दर्शन आज भी याद है। उन्होंने कहा कि युग ऋषि की ओर से चलाए गए सप्त आंदोलन साधना, शिक्षा, पर्यावरण, स्वावलंबन, नारी जागरण, व्यसन मुक्ति एवं आदर्श ग्राम को मध्य प्रदेश शासन में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लागू किया।

इसका प्रत्यक्ष लाभ वहां के लोगों को मिल रहा है। शिवराज चौहान ने कहा कि विश्व का शाश्वत शांति की ओर मार्गदर्शन भारत करेगा, जिसमे अखिल विश्व गायत्री परिवार जैसे आधात्मिक-सामाजिक संस्थानों का महत्वपूर्ण योगदान होगा।

देसंविवि के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने मुख्यमंत्री चौहान का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे व्यक्ति से युग ऋषि गुरुदेव के जीवन को सुनने को अवसर मिला है, जो स्वयं गुरुदेव के दिखाए रास्ते पर चलकर सामाजिक जीवन की उत्कृष्टता को हासिल किए। कुलपति एवं प्रतिकुलपति ने शिवराज सिंह चौहान को गायत्री स्मृति चिन्ह, गंगाजल एवं पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का साहित्य देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर कुलपति शरद पारधी, कुलसचिव बलदाऊदेवांगन मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि चारधाम देवस्थानम बोर्ड के बाद अब भू-कानून पर भी राज्य हित में फैसला लिया जाएगा। इसके लिए सभी की बात सुनी जाएगी और राय ली जाएगी। सरकार का फैसला उत्तराखंड के हित में होगा। 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बृहस्पतिवार को देव संस्कृत विश्वविद्यालय में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही। दोनों मुख्यमंत्रियों ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय परिसर स्थित शौर्य दीवार पर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया।

इसके बाद देव संस्कृति विश्वविद्यालय परिसर में मौलश्री के पौधे का रोपण किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं। जिनसे लगातार मार्गदर्शन मिलता रहा है। इस दौरान कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पंडया आदि मौजूद रहे।

विस्तार

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वैभवशाली और गौरवशाली संपन्न भारत का निर्माण हो रहा है। उसके निर्माण के लिए संन्यासियों ने योग, आयुर्वेद, शिक्षा और अध्यात्म के माध्यम से देश ही नहीं पूरे विश्व में क्रांति की है। उन्होंने कहा कि योग की शिक्षा के लिए मध्य प्रदेश में अभियान चलाया जाएगा और प्रदेश में योग आयोग का गठन किया जाएगा। 

सीएम शिवराज सिंह चौहान बृहस्पतिवार को आजादी के अमृत महोत्सव पर पतंजलि योगपीठ में ‘वैश्विक चुनौतियों का सनातन समाधान-एकात्म बोध’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं 75 करोड़ सूर्य नमस्कार संकल्प कार्यक्रम की वेबसाइट के लोकार्पण समारोह में बोल रहे थे। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि योग ऋषि स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने योग, आयुर्वेद, भारतीय संस्कृति, वैदिक शिक्षा को विश्व पटल पर स्थापित किया है। स्वदेशी से आत्मनिर्भर भारत के नव-निर्माण के लिए योग व उद्योग के माध्यम से पतंजलि लाखों किसानों एवं युवाओं को रोजगार प्रदान कर रहा है। 

इस मौके पर योग गुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि कहा कि देश में योग शिक्षा को आंशिक रूप से लागू करने के लिए टुकड़ों में प्रयास हो रहे थे, लेकिन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने योग को व्यापक रूप से शिक्षा का अंग बनाने की पहल की है। 

आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि से योग के महाअभियान का सूत्रपात होने जा रहा है। मध्य प्रदेश सरकार संस्कृति, परंपरा के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए बेहतर कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रदेश के स्कूलों में योग शिक्षा लागू कर गांव-गांव तक योग के प्रचार-प्रसार की प्रतिबद्धता दोहराई है। उन्होंने कहा कि आज जीवन में विभिन्न प्रकार की समस्याएं हैं। यदि हम सनातन परंपराओं के आश्रय और जड़ को पकड़कर रखेंगे तो समस्याओं का समाधान वहीं से मिलेगा।



Source link

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Haridwar

Padma Awards 2022: Hat-trick Girl Vandana Katariya Who Created History In Tokyo Olympics Get Padma Shri – Padma Awards 2022: टोक्यो ओलंपिक में इतिहास रचने वाली हैट्रिक गर्ल को पद्मश्री, मिल चुका है अर्जुन अवार्ड 

Published

on

By


संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Wed, 26 Jan 2022 11:07 AM IST

सार

हरिद्वार के रोशनाबाद गांव की अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी वंदना कटारिया ने पिछले साल हुए टोक्यो ओलंपिक में देश का नाम विश्वभर में रोशन किया। वंदना ने टोक्यो ओलंपिक में हैट्रिक लगाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

ख़बर सुनें

हैट्रिक गर्ल वंदना कटारिया को अर्जुन अवार्ड के बाद पद्मश्री मिलने से हरिद्वार में जश्न का माहौल है। वंदना के गांव से लेकर प्रदेश के खेल प्रेमियों में खुशी की लहर है। ग्रामीणों का कहना है कि वंदना ने गांव का नाम एक बार फिर रोशन किया है।

ओलंपिक में हैट्रिक लगाने वाली पहली भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी
हरिद्वार के रोशनाबाद गांव की अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी वंदना कटारिया ने पिछले साल हुए टोक्यो ओलंपिक में देश का नाम विश्वभर में रोशन किया। वंदना ने टोक्यो ओलंपिक में हैट्रिक लगाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। इसके साथ ही ओलंपिक में हैट्रिक लगाने वाली पहली भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी भी बन गई। 

खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों में खुशी की लहर
इस उपलब्धि पर पिछले साल वंदना कटारिया को भारत सरकार की ओर से अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया। मंगलवार को भारत सरकार ने वंदना कटारिया को पद्मश्री से सम्मानित करने की घोषणा की। वंदना को पद्मश्री अवार्ड मिलने से ग्रामीणों, खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों में खुशी की लहर है। जिला प्रभारी खेड़ा अधिकारी वरुण बेलवाल ने बताया कि वंदना ने हरिद्वार ही नहीं प्रदेश का नाम देश में रोशन किया है।

वंदना ने देश और दुनिया में पहचान बनाई
वंदना लड़कियों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि प्रतिभा के लिए संसाधनों की जरूरत नहीं होती है। वंदना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। गांव से निकलकर वंदना ने देश और दुनिया में पहचान बनाई है। वंदना के भाई पंकज कटारिया, लखन कटारिया, माता स्वर्ण देवी ने बताया कि वंदना ने पिता के सपने को साकार कर उनको सच्ची श्रद्धांजलि दी है। परिजनों ने बताया कि वंदना को पद्मश्री मिलने की खबर से गांव में जश्न का माहौल है। वंदना के गांव पहुंचने पर उसका भव्य स्वागत किया जाएगा। 

विस्तार

हैट्रिक गर्ल वंदना कटारिया को अर्जुन अवार्ड के बाद पद्मश्री मिलने से हरिद्वार में जश्न का माहौल है। वंदना के गांव से लेकर प्रदेश के खेल प्रेमियों में खुशी की लहर है। ग्रामीणों का कहना है कि वंदना ने गांव का नाम एक बार फिर रोशन किया है।

ओलंपिक में हैट्रिक लगाने वाली पहली भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी

हरिद्वार के रोशनाबाद गांव की अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी वंदना कटारिया ने पिछले साल हुए टोक्यो ओलंपिक में देश का नाम विश्वभर में रोशन किया। वंदना ने टोक्यो ओलंपिक में हैट्रिक लगाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। इसके साथ ही ओलंपिक में हैट्रिक लगाने वाली पहली भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी भी बन गई। 

खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों में खुशी की लहर

इस उपलब्धि पर पिछले साल वंदना कटारिया को भारत सरकार की ओर से अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया। मंगलवार को भारत सरकार ने वंदना कटारिया को पद्मश्री से सम्मानित करने की घोषणा की। वंदना को पद्मश्री अवार्ड मिलने से ग्रामीणों, खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों में खुशी की लहर है। जिला प्रभारी खेड़ा अधिकारी वरुण बेलवाल ने बताया कि वंदना ने हरिद्वार ही नहीं प्रदेश का नाम देश में रोशन किया है।

वंदना ने देश और दुनिया में पहचान बनाई

वंदना लड़कियों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि प्रतिभा के लिए संसाधनों की जरूरत नहीं होती है। वंदना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। गांव से निकलकर वंदना ने देश और दुनिया में पहचान बनाई है। वंदना के भाई पंकज कटारिया, लखन कटारिया, माता स्वर्ण देवी ने बताया कि वंदना ने पिता के सपने को साकार कर उनको सच्ची श्रद्धांजलि दी है। परिजनों ने बताया कि वंदना को पद्मश्री मिलने की खबर से गांव में जश्न का माहौल है। वंदना के गांव पहुंचने पर उसका भव्य स्वागत किया जाएगा। 



Source link

Continue Reading

Haridwar

Uttarakhand Assembly election 2022: Haridwar Mangalore Seat Report – Uttarakhand Election 2022: मंगलौर सीट पर कभी हाजी तो कभी काजी, अबकी किसके हाथ लगेगी बाजी 

Published

on

By


संवाद न्यूज एजेंसी, मंगलौर
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Mon, 24 Jan 2022 02:15 PM IST

सार

पिछले विधानसभा चुनाव में जातीय समीकरणों में फंसी भाजपा ने त्रिकोणीय मुकाबले में बेहतर प्रदर्शन किया था। बावजूद इसके तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा था।

ख़बर सुनें

राज्य गठन के बाद अस्तित्व में आई मंगलौर विधानसभा सीट पर बाजी कभी हाजी तो कभी काजी के हाथ लगती रही। इस तिलिस्म को तोड़ने के लिए इस बार भाजपा ने दो बार के पूर्व विधायक तेजपाल सिंह पंवार के बेटे दिनेश सिंह पंवार को मैदान में उतारा है। पिछले विधानसभा चुनाव में जातीय समीकरणों में फंसी भाजपा ने त्रिकोणीय मुकाबले में बेहतर प्रदर्शन किया था। बावजूद इसके तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा था। अब देखना यह है कि इस बार मंगलौर की जनता किसके सिर पर जीत का सेहरा बांधती है।

लक्सर विधानसभा का हिस्सा हुआ करता था मंगलौर क्षेत्र
मंगलौर विधानसभा सीट राज्य गठन के बाद अस्तित्व में आई थी। इससे पूर्व मंगलौर क्षेत्र लक्सर विधानसभा का हिस्सा हुआ करता था। राज्य गठन के बाद वर्ष 2002 और 2007 में हुए विधानसभा चुनावों में बसपा से काजी निजामुद्दीन ने लगातार दो बार जीत दर्ज की थी। पहली बार उन्होंने लोकदल के प्रत्याशी और दूसरी बार कांग्रेस के हाजी सरवत करीम अंसारी को हराया था। भाजपा दोनों बार चौथे स्थान पर रही थी। इसके बाद वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में दोनों नेताओं ने पाला बदल लिया था। बसपा से दो बार विधायक रहे काजी निजामुद्दीन ने कांग्रेस का दामन थाम लिया था जबकि हाजी सरवत करीम अंसारी ने बसपा ज्वाइन की थी।

Uttarakhand Assembly Election 2022: सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा ‘धाकड़ धामी’

बसपा के हाजी सरवत करीम अंसारी ने कांग्रेस प्रत्याशी काजी निजामुद्दीन को परास्त कर दिया था और तीसरी बार भी इस सीट पर बसपा का दबदबा रहा। वर्ष 2017 के चुनाव में कांग्रेस के काजी निजामुद्दीन ने बसपा के तिलिस्म को तोड़ते हुए पहली बार मंगलौर विधानसभा सीट को कांग्रेस की झोली में डाल दिया था।

मंगलौर विधानसभा सीट पर तीन बार बसपा और एक बार कांग्रेस ने जीत हासिल की है जबकि पिछले चुनाव में भाजपा तीसरे स्थान पर थी। इस बार भाजपा के लिए कांग्रेस के काजी निजामुद्दीन और बसपा के हाजी सरवत करीम अंसारी के दो दशकों से चले आ रहे तिलिस्म को तोड़ने की बड़ी चुनौती होगी। हालांकि, वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को 16 हजार से अधिक मत मिले थे।

इसके आधार पर इस बार भाजपा के कुछ नेता अपनी जीत पक्की मान रहे हैं। भाजपा से इस बार करीब 26 कार्यकर्ताओं ने टिकट के लिए आवेदन किया था, लेकिन पार्टी ने गुर्जर समाज के बड़े नेता रहे पूर्व विधायक तेजपाल पंवार के पुत्र दिनेश पंवार पर दांव लगाया है। अब देखना होगा कि भाजपा के दो दशकों से चले आ रहे सूखे को क्या वह खत्म कर पाएंगे, या फिर से हाजी और काजी में से किसी एक सिर पर जीत का सेहरा बंधेगा।

विस्तार

राज्य गठन के बाद अस्तित्व में आई मंगलौर विधानसभा सीट पर बाजी कभी हाजी तो कभी काजी के हाथ लगती रही। इस तिलिस्म को तोड़ने के लिए इस बार भाजपा ने दो बार के पूर्व विधायक तेजपाल सिंह पंवार के बेटे दिनेश सिंह पंवार को मैदान में उतारा है। पिछले विधानसभा चुनाव में जातीय समीकरणों में फंसी भाजपा ने त्रिकोणीय मुकाबले में बेहतर प्रदर्शन किया था। बावजूद इसके तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा था। अब देखना यह है कि इस बार मंगलौर की जनता किसके सिर पर जीत का सेहरा बांधती है।

लक्सर विधानसभा का हिस्सा हुआ करता था मंगलौर क्षेत्र

मंगलौर विधानसभा सीट राज्य गठन के बाद अस्तित्व में आई थी। इससे पूर्व मंगलौर क्षेत्र लक्सर विधानसभा का हिस्सा हुआ करता था। राज्य गठन के बाद वर्ष 2002 और 2007 में हुए विधानसभा चुनावों में बसपा से काजी निजामुद्दीन ने लगातार दो बार जीत दर्ज की थी। पहली बार उन्होंने लोकदल के प्रत्याशी और दूसरी बार कांग्रेस के हाजी सरवत करीम अंसारी को हराया था। भाजपा दोनों बार चौथे स्थान पर रही थी। इसके बाद वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में दोनों नेताओं ने पाला बदल लिया था। बसपा से दो बार विधायक रहे काजी निजामुद्दीन ने कांग्रेस का दामन थाम लिया था जबकि हाजी सरवत करीम अंसारी ने बसपा ज्वाइन की थी।

Uttarakhand Assembly Election 2022: सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा ‘धाकड़ धामी’

बसपा के हाजी सरवत करीम अंसारी ने कांग्रेस प्रत्याशी काजी निजामुद्दीन को परास्त कर दिया था और तीसरी बार भी इस सीट पर बसपा का दबदबा रहा। वर्ष 2017 के चुनाव में कांग्रेस के काजी निजामुद्दीन ने बसपा के तिलिस्म को तोड़ते हुए पहली बार मंगलौर विधानसभा सीट को कांग्रेस की झोली में डाल दिया था।

मंगलौर विधानसभा सीट पर तीन बार बसपा और एक बार कांग्रेस ने जीत हासिल की है जबकि पिछले चुनाव में भाजपा तीसरे स्थान पर थी। इस बार भाजपा के लिए कांग्रेस के काजी निजामुद्दीन और बसपा के हाजी सरवत करीम अंसारी के दो दशकों से चले आ रहे तिलिस्म को तोड़ने की बड़ी चुनौती होगी। हालांकि, वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को 16 हजार से अधिक मत मिले थे।

इसके आधार पर इस बार भाजपा के कुछ नेता अपनी जीत पक्की मान रहे हैं। भाजपा से इस बार करीब 26 कार्यकर्ताओं ने टिकट के लिए आवेदन किया था, लेकिन पार्टी ने गुर्जर समाज के बड़े नेता रहे पूर्व विधायक तेजपाल पंवार के पुत्र दिनेश पंवार पर दांव लगाया है। अब देखना होगा कि भाजपा के दो दशकों से चले आ रहे सूखे को क्या वह खत्म कर पाएंगे, या फिर से हाजी और काजी में से किसी एक सिर पर जीत का सेहरा बंधेगा।



Source link

Continue Reading

Haridwar

Uttarakhand Assembly Election 2022: When Left Leader And Other Party Leader Were Meet For Development – उत्तराखंड सत्ता संग्राम 2022: जब स्थानीय के नाम लेफ्ट और राइट ने मिलाई थी कदमताल, कभी दी पटखनी तो कभी मिली हार

Published

on

By


कौशल सिखौला, संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sat, 22 Jan 2022 02:10 PM IST

सार

ऐसा पहला चुनाव वर्ष 1968 में हुआ था। तब हरिद्वार विधानसभा सीट को परवादून सीट कहा जाता था, जिसका विस्तार ऋषिकेश और डोईवाला तक था।

ख़बर सुनें

आजादी के बाद हरिद्वार में हुए दो विधानसभा चुनाव सचमुच अभूतपूर्व थे। चुनावों में स्थानीय के नाम पर अस्मिता बचाने का ऐसा सवाल खड़ा हुआ कि पार्टियों की बाध्यता के सारे बंधन टूट गए। नगर की प्रतिष्ठा बचाने के नाम पर अलग-अलग दलों के कार्यकर्ता एक मंच पर आ गए थे। नतीजा यह हुआ कि एक बार तो उस जमाने में पंडित जवाहर लाल नेहरू के घनिष्ट मित्र और यूपी के कैबिनेट मंत्री रहे शांतिप्रपन्न शर्मा को भारी पराजय झेलनी पड़ी।

Harak Singh Rawat: जीत की उम्मीद में कांग्रेस पी गई अपमान का घूंट, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का भी समर्पण

ऐसा पहला चुनाव वर्ष 1968 में हुआ था। तब हरिद्वार विधानसभा सीट को परवादून सीट कहा जाता था, जिसका विस्तार ऋषिकेश और डोईवाला तक था। चुनाव में हरिद्वार शहर से किसी को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाने की बात जोर पकड़ गई। लेकिन ऋषिकेश निवासी शांतिप्रपन्न शर्मा बड़े नेता थे, विधायक और कैबिनेट मंत्री थे। इसलिए हरिद्वार के लोगों की नहीं सुनी गई। इस पर हरिद्वार की दलीय राजनीति गौण हो गई और जनसंघ, सोशलिस्ट, कम्युनिस्ट आदि सभी एक मंच पर आ गए।

बुरी तरह पराजित हो गए थे शांतिप्रपन्न शर्मा
सभी ने हरिद्वार के गृहस्थ महंत घनश्याम गिरी को संयुक्त प्रत्याशी घोषित कर दिया। बहुत मधुर और शर्मीले महंत घनश्याम गिरी की लड़ाई हरिद्वार की लड़ाई बन गई। देखते ही देखते निर्दलीय लड़ रहे घनश्याम गिरी का चुनाव प्रचार ने जोर पकड़ लिया था और शांतिप्रपन्न शर्मा बुरी तरह पराजित हो गए थे।

ऐसा दूसरा चुनाव 1985 में अंबरीष कुमार ने लड़ा। यह उनका पहला विधानसभा चुनाव था। उन्हें कांग्रेस का टिकट मिलना निश्चित था। लेकिन टिकट इंदु राणा को मिल गया। अंबरीष समर्थक नाराज हो गए। इंदु के घर मिठाई बंटने लगी।

अगले दिन अंबरीष समर्थक प्रदर्शन कर रहे थे कि इंदु राणा का भी टिकट काटकर सहारनपुर के महावीर राणा को कांग्रेस प्रत्याशी घोषित कर दिया। तब बड़ा बवाल हुआ और अमरीष ने क्रांतिकारी मंच बनाने की घोषणा कर दी। अमरीष को मंच का प्रत्याशी बनाया गया। स्थानीय और बाहरी के नाम पर अमरीष व महावीर के बीच कांटे की टक्कर हुई। बाद में मतगणना केंद्र पर हुए जोरदार हंगामे के बाद महावीर राणा को 71 मतों से विजयी घोषित किया गया।

विस्तार

आजादी के बाद हरिद्वार में हुए दो विधानसभा चुनाव सचमुच अभूतपूर्व थे। चुनावों में स्थानीय के नाम पर अस्मिता बचाने का ऐसा सवाल खड़ा हुआ कि पार्टियों की बाध्यता के सारे बंधन टूट गए। नगर की प्रतिष्ठा बचाने के नाम पर अलग-अलग दलों के कार्यकर्ता एक मंच पर आ गए थे। नतीजा यह हुआ कि एक बार तो उस जमाने में पंडित जवाहर लाल नेहरू के घनिष्ट मित्र और यूपी के कैबिनेट मंत्री रहे शांतिप्रपन्न शर्मा को भारी पराजय झेलनी पड़ी।

Harak Singh Rawat: जीत की उम्मीद में कांग्रेस पी गई अपमान का घूंट, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का भी समर्पण

ऐसा पहला चुनाव वर्ष 1968 में हुआ था। तब हरिद्वार विधानसभा सीट को परवादून सीट कहा जाता था, जिसका विस्तार ऋषिकेश और डोईवाला तक था। चुनाव में हरिद्वार शहर से किसी को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाने की बात जोर पकड़ गई। लेकिन ऋषिकेश निवासी शांतिप्रपन्न शर्मा बड़े नेता थे, विधायक और कैबिनेट मंत्री थे। इसलिए हरिद्वार के लोगों की नहीं सुनी गई। इस पर हरिद्वार की दलीय राजनीति गौण हो गई और जनसंघ, सोशलिस्ट, कम्युनिस्ट आदि सभी एक मंच पर आ गए।

बुरी तरह पराजित हो गए थे शांतिप्रपन्न शर्मा

सभी ने हरिद्वार के गृहस्थ महंत घनश्याम गिरी को संयुक्त प्रत्याशी घोषित कर दिया। बहुत मधुर और शर्मीले महंत घनश्याम गिरी की लड़ाई हरिद्वार की लड़ाई बन गई। देखते ही देखते निर्दलीय लड़ रहे घनश्याम गिरी का चुनाव प्रचार ने जोर पकड़ लिया था और शांतिप्रपन्न शर्मा बुरी तरह पराजित हो गए थे।

ऐसा दूसरा चुनाव 1985 में अंबरीष कुमार ने लड़ा। यह उनका पहला विधानसभा चुनाव था। उन्हें कांग्रेस का टिकट मिलना निश्चित था। लेकिन टिकट इंदु राणा को मिल गया। अंबरीष समर्थक नाराज हो गए। इंदु के घर मिठाई बंटने लगी।

अगले दिन अंबरीष समर्थक प्रदर्शन कर रहे थे कि इंदु राणा का भी टिकट काटकर सहारनपुर के महावीर राणा को कांग्रेस प्रत्याशी घोषित कर दिया। तब बड़ा बवाल हुआ और अमरीष ने क्रांतिकारी मंच बनाने की घोषणा कर दी। अमरीष को मंच का प्रत्याशी बनाया गया। स्थानीय और बाहरी के नाम पर अमरीष व महावीर के बीच कांटे की टक्कर हुई। बाद में मतगणना केंद्र पर हुए जोरदार हंगामे के बाद महावीर राणा को 71 मतों से विजयी घोषित किया गया।



Source link

Continue Reading

Trending